Maulana Mazrul Haq University : 70 प्रतिशत उपस्थिति पूरी नहीं होने के आधार पर एक छात्र को परीक्षा में शामिल होने से रोकने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने मौलाना मजहरुल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय से जवाब तलब किया है. न्यायमूर्ति हरीश कुमार की एकलपीठ ने मो. फहीम खान बनाम स्टेट ऑफ बिहार एवं अन्य मामले की सुनवाई करते हुए विश्वविद्यालय को काउंटर-अफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है.
याचिकाकर्ता का आरोप विवि ने पर्याप्त कक्षाएं नहीं कराईं
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि दूसरे सेमेस्टर में विश्वविद्यालय ने महज 32 कक्षाएं आयोजित कीं, जबकि परीक्षा में शामिल होने के लिए 70 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य बताई गई. इस पर अदालत के समक्ष महत्वपूर्ण सवाल उठा कि यदि विश्वविद्यालय ने सेमेस्टर में निर्धारित संख्या में कक्षाएं आयोजित ही नहीं कीं, तो आवश्यक उपस्थिति पूरी नहीं होने के लिए छात्र को कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.
शून्य फीसदी उपस्थिति वाले छात्रों की विशेष परीक्षा का उठा मुद्दा
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि उसी विश्वविद्यालय में कुछ ऐसे विद्यार्थियों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित की गई, जिनकी उपस्थिति कथित तौर पर शून्य प्रतिशत तक थी. वहीं, याचिकाकर्ता का आरोप है कि संस्थान से जुड़ी अपनी शिकायत उठाने के कारण उसे 70 प्रतिशत उपस्थिति पूरी नहीं होने का हवाला देकर परीक्षा में शामिल होने से रोक दिया गया.
पुराने आदेश के बावजूद दाखिल नहीं हुआ जवाब
मामले की सुनवाई 11 अगस्त 2026 को हुई. कोर्ट ने कहा कि 18 अगस्त 2025 और 7 अक्टूबर 2025 को निर्देश दिए जाने के बावजूद विश्वविद्यालय की ओर से अब तक काउंटर-अफिडेविट दाखिल नहीं किया गया है.
विवि ने अगले सत्र में परीक्षा की अनुमति देने का दिया सुझाव
विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा पहले ही आयोजित हो चुकी है और फिलहाल नया सत्र चल रहा है. विश्वविद्यालय की ओर से सुझाव दिया गया कि याचिकाकर्ता को अगले सत्र में कक्षाओं में शामिल होने के बाद परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जा सकती है.
28 अगस्त तक जवाब, नहीं तो लगेगा 20 हजार का खर्च
अदालत ने विश्वविद्यालय को याचिका के पैराग्राफ 16, 17 और 18 में उठाए गए बिंदुओं पर विशेष रूप से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि 28 अगस्त 2026 तक काउंटर-अफिडेविट दाखिल नहीं किया गया तो विश्वविद्यालय पर 20 हजार रुपये का खर्च लगाया जाएगा. यह राशि पटना हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी में जमा करनी होगी.
साथ ही विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है.
