कमाते करोड़ों और दिखाते हैं लाखों व हजारों

कमाते करोड़ों और दिखाते हैं लाखों व हजारोंफ्लैगडॉक्टर और नर्सिंग होम आयकर चोरी के लिए लगाते हैं कई जुगत- आयकर की छापेमारी में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की बात आयी सामनेसंवाददाता, पटनाशहर में हजारों की संख्या में डॉक्टर निजी प्रैक्टिस करते हैं और करीब इतनी ही संख्या में नर्सिंग होम भी भरे हुए हैं. इनसे […]

कमाते करोड़ों और दिखाते हैं लाखों व हजारोंफ्लैगडॉक्टर और नर्सिंग होम आयकर चोरी के लिए लगाते हैं कई जुगत- आयकर की छापेमारी में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की बात आयी सामनेसंवाददाता, पटनाशहर में हजारों की संख्या में डॉक्टर निजी प्रैक्टिस करते हैं और करीब इतनी ही संख्या में नर्सिंग होम भी भरे हुए हैं. इनसे भी बड़ी संख्या में निजी और सरकारी डॉक्टर जुड़े हुए हैं. ये सभी मरीजों से बिना एक पैसा लिये भले ही इलाज नहीं करते हों, लेकिन आयकर की चोरी या छिपाने की तमाम जुगत लगाते हैं. खासकर नर्सिंग होमवाले कमाते करोड़ों में हैं, जबकि आयकर विभाग को लाखों या हजारों में ही कमाई दिखाते हैं. कुछ तो यह भी नहीं करते. हाल में कुछ नर्सिंग होम में आयकर की छापेमारी के दौरान इनकी गड़बड़ी करने की जुगत की पोल खुली है.दो-तीन दिन पहले ही इनकम टैक्स की टीम कुछ नर्सिंग होम में टीडीएस से संबंधित सर्वे करने गयी थी, लेकिन जांच के दौरान काफी बड़े स्तर पर गड़बड़ी मिलने लगी. इससे यह सर्वे छापेमारी में तब्दील करनी पड़ी. इस दौरान कई बातें सामने आयीं, जबकि मरीजों से ये लोग टीडीएस या टैक्स के नाम पर पैसे ऐंठ लेते हैं. नहीं भरते फॉर्म 3-सीतकरीबन सभी प्रैक्टिसिंग डॉक्टर और निजी नर्सिंग होमवाले आयकर विभाग की तरफ से निर्धारित ‘फॉर्म 3-सी’ नहीं भरते हैं और न ही इसे मेंटेन करते हैं. इस वजह से ये मरीजों की संख्या और समुचित ब्योरे को उजागर ही नहीं होने देते हैं. ‘फॉर्म 3-सी’ के तहत सभी तरह के मेडिकल प्रोफेशनल (मेडिकल प्रैक्टिसनर, नर्सिंग होम, निजी हॉस्पिटल, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, डेंटिस्ट, डायटिशियन आदि) को एक रजिस्टर मेंटेन करना होता है, जिसमें रोजाना सभी आने-जाने वाले मरीजों का पूरा विवरण लिखना होता है. इस रजिस्टर को कम-से-कम छह साल तक संभाल कर रखना पड़ता है. ऐसा नहीं करनेवालों पर जुर्माना करने का प्रावधान है.194-जे के तहत नहीं काटते टीडीएसनर्सिंग होमवाले कई डॉक्टरों खास कर सरकारी या बड़े डॉक्टरों को अपने यहां से जो पेमेंट करते हैं, उसमें 194-जे के तहत टीडीएस नहीं काटते हैं. जबकि नियमानुसार इसके तहत 10 प्रतिशत की दर से टीडीएस काट कर आयकर को जमा करने का प्रावधान है. कई मामलों में टीडीएस काटते भी हैं, तो उसे आयकर विभाग को जमा नहीं करते हैं. नर्सिंग होम के दस्तावेजों का मिलान करने पर पता चल रहा है कि ये लोग अपने पास विजिट करनेवाले डॉक्टरों को जितना पेमेंट करते हैं या इसके नाम पर मरीजों से जितनी की वसूली करते हैं, उसे कम करके दिखा कर बड़े स्तर पर टैक्स की चोरी करते हैं. इनका खाता कुछ कहता है और हकीकत कुछ और होती है.सबसे बड़ी गड़बड़ी टीडीएस कीआयकर विभाग को छापेमारी के दौरान इस तरह की गड़बड़ी बड़े स्तर पर मिली है. इस कारण आनेवाले दिनों में कई बड़े डॉक्टरों और नर्सिंग होम में विभाग सर्वे कर सकता है. टैक्स में गड़बड़ी के मामले में सबसे ज्यादा गड़बड़ी टीडीएस की ही सामने आ रही है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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