इ-संबद्धन पोर्टल पर जिले में 42 निजी स्कूलों ने स्वीकृति के लिए किया आवेदन
निजी स्कूलों को स्वीकृति के लिए शिक्षा विभाग के इ-संबद्धन पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.
स्कूलों की जांच के लिए जिले में पांच सदस्यीय कमेटी बनी, स्थल जांच के बाद मिलेगी स्वीकृति
संवाददाता, पटना
निजी स्कूलों को स्वीकृति के लिए शिक्षा विभाग के इ-संबद्धन पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. पटना जिले में अब तक 42 आवेदन आ चुके हैं. इसमें आवेदन करने वाले कक्षा एक से आठवीं तक के निजी स्कूल शामिल हैं. स्कूलों की जांच के लिए जिला पदाधिकारी के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गयी है. कमेटी में जिला पदाधिकारी के अलावा जिला शिक्षा कार्यालय से जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा), सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी और संबंधित प्रखंड के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी शामिल हैं. जिला शिक्षा कार्यालय ने कहा है कि आवेदन के आधार अगले सप्ताह स्वीकृति कमेटी की बैठक होगी. इससे पहले जिन निजी स्कूलों ने आवेदन किया, उनका स्थल निरीक्षण किया जायेगा. स्थल निरीक्षण के बाद कमेटी निजी स्कूलों की स्वीकृति पर विचार करेगी.
कक्षा एक से पांचवीं तक 60 बच्चों पर दो शिक्षक अनिवार्य
नियम के अनुसार कक्षा एक से पांचवीं कक्षा तक की मान्यता के लिए 60 नामांकित बच्चों पर कम से कम दो शिक्षक अनिवार्य हैं. जबकि 61 से 90 के बीच बच्चों की संख्या पर तीन, 91 से 120 बच्चों पर चार, 121 से 200 बच्चों के बीच पांच शिक्षकों का होना जरूरी है. इसके अलावा 150 बच्चों पर पांच शिक्षक व एक प्रधानाध्यापक होना जरूरी है. 200 से अधिक बच्चों पर छात्र-शिक्षक अनुपात (प्रधानाध्यापक को छोड़ कर) 40 से अधिक नहीं होना चाहिए. छठी कक्षा से आठवीं के लिए कम से कम प्रति कक्षा एक शिक्षक होना चाहिए. विज्ञान और गणित, सामाजिक अध्ययन, भाषा विषय के शिक्षक होना जरूरी है. प्रत्येक 35 बच्चों के लिए कम से एक शिक्षक अनिवार्य हैं. जहां 100 से अधिक बच्चे नामांकित हैं, वहां पूर्णकालिक प्रधान शिक्षक होने चाहिए. कला शिक्षा, स्वास्थ्य व शारीरिक शिक्षा शिक्षक होना भी जरूरी है.
स्कूल पहुंचने में नहीं हो कोई बाधा
निजी स्कूलों की जांच में यह देखा जायेगा कि स्कूल तक पहुंचने में कोई बाधा नहीं हो. लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय आवश्यक है. पेयजल सुविधा के अलावा खेल का मैदान और स्कूल में चहारदीवारी हो. स्कूल में कम से कम प्रधानाध्यापक को छोड़ सात कमरे होने चाहिए. कक्षा एक से पांचवीं तक के लिए प्रति शैक्षणिक वर्ष 800 शिक्षण घंटे और छठवीं से आठवीं के लिए एक हजार शिक्षण घंटे की पढ़ाई आवश्यक है. शिक्षक प्रति सप्ताह 45 घंटे शिक्षण कार्य करेंगे. इसके अलावा पुस्तकालय, खेल सामग्री आदि होना भी आवश्यक है.
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