तीन दलों के आधे नाम जोड़ बनेगी नयी पार्टी

जनता परिवार : विलय के बाद दिखेगा पुराना जनता दल सैफई महोत्सव के बाद फिर दिल्ली में जुटेंगे नीतीश, लालू व मुलायम मिथिलेश पटना : समाजवादियों की जुटान और विलय के बाद बिहार में 1990 का जनता दल एक बार फिर नये स्वरूप में नजर आयेगा. जदयू और राजद समेत छह दलों का विलय हो […]

जनता परिवार : विलय के बाद दिखेगा पुराना जनता दल
सैफई महोत्सव के बाद फिर दिल्ली में जुटेंगे नीतीश, लालू व मुलायम
मिथिलेश
पटना : समाजवादियों की जुटान और विलय के बाद बिहार में 1990 का जनता दल एक बार फिर नये स्वरूप में नजर आयेगा. जदयू और राजद समेत छह दलों का विलय हो गया, तो इस नये दल में तीन प्रमुख दलों के नाम समाहित होंगे. नये दल का नाम समाजवादी जनता दल रखने पर कमोवेश सभी पार्टियों के बीच सहमति बन चुकी है. सभी दलों का एक झंडा, एक सिंबल और एक मिशन होगा. इस नये दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव.
नीतीश कुमार पार्टी के चेहरे होंगे और बिहार विधानसभा चुनाव में वह नयी पार्टी के नेता होंगे. लालू प्रसाद मेंटोर की भूमिका में होंगे. बिहार में प्रदेश अध्यक्ष की कमान राजद के खाते में जा सकती है. सूत्र बताते हैं कि इस पद पर किसी अल्पसंख्यक नेता को बिठाया जायेगा. नये गंठबंधन में कांग्रेस भी सहभागी हो सकती है. लेकिन, वह बाहर से साथ होगी. विलय की अगुआई कर रहे नीतीश कुमार ने वाम दलों को भी साथ लाने की पहल का संकेत दिया है. वहीं, लालू प्रसाद ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इसका हिस्सा बनाने का दावा किया है. आठ जनवरी को यूपी के सैफई महोत्सव की समाप्ति के बाद सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव दिल्ली पहुंचेंगे. इसके बाद तीसरी बार सभी नेताओं की बैठक होगी और आगे की रणनीति तय की जायेगी.
सरकार में भी होगी हिस्सेदारी
विलय के बाद प्रदेश में सरकार के स्वरूप में भी बदलाव आयेगा. सरकार में राजद बैकग्राउंड के लोग भी शामिल होंगे. विलय को लेकर जदयू और राजद के अंदर विरोध के स्वर नहीं दिख रहे. दोनों दलों ने अपने कार्यकर्ताओं को यह समझा दिया है कि यदि भाजपा के मुकाबले अस्तित्व बनाये रखना है, तो मिल कर चुनाव लड़ने में ही भलाई है. जदयू सूत्र बताते हैं कि विलय के सवाल पर पार्टी ने अपनी तकनीकी तैयारी पूरी कर ली है. रविवार को प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में नीतीश कुमार ने यह साफ कर दिया कि उनका दल पूरी तरह तैयार है. राजद के भीतर यह कसरत अभी जारी है.
विलय के मसौदे को अंतिम रूप दे चुके नीतीश कुमार और लालू प्रसाद ने साफ कर दिया है कि दल के नेता को लेकर कोई विवाद नहीं रह गया है. दोनों दलों की समझ है कि लोकसभा चुनाव में जदयू-राजद को मिले वोट का प्रतिशत विधानसभा चुनाव में भी बरकरार रह गया, तो भाजपा का विजयी रथ रुक जायेगा. इसके लिए प्रदेश के सामाजिक न्याय के दायरे में आनेवाली जातियों को अपने पक्ष में गोलबंद करने की तैयारी है. सबसे अधिक मुखर रहे युवा वोटरों को महागंठबंधन से जोड़ने के लिए टिकट वितरण और प्रचार कार्य में अधिक भागीदारी दी जायेगी.
बेस वोट को बांधे रखना चुनौती
नीतीश-लालू की गोलबंदी को पंक्चर करने की की तैयारी में जुटी भाजपा भी अपना हथियार सामाजिक न्याय को ही बनायेगी. इसके लिए सबसे अधिक आबादीवाले यादव मतदाताओं पर उसने अपना फोकस किया है. भूपेंद्र यादव को बिहार प्रभारी बना कर और राजद से आये रामकृपाल यादव को केंद्र में मंत्री पद देकर इस वर्ग के युवाओं को अपनी ओर मोड़ने की कोशिश की है. दूसरी ओर कोसी इलाके में राजद सांसद पप्पू यादव की बढ़ती महत्वाकांक्षा को पूरा कर पाना गंठबंधन की चुनौती बन सकती है. अतिपिछड़ा और सवर्ण जातियों को भाजपा से दूरी बनाने की चुनौती भी गंठबंधन के सामने है.
टिकट बंटवारे में दिक्कत नहीं
जानकारी के अनुसार जदयू और राजद के बीच असली चुनौती टिकट बांटने की होगी. सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं ने इसका भी हल खोज रखा है. भाजपा के मुकाबले गंठबंधन का वन टू वन उम्मीदवार होगा. समाजवादी पार्टी को भी हिस्सेदारी मिल सकती है. फिलहाल 242 सदस्यीय बिहार विधानसभा में जदयू के 115 और राजद के 24 विधायक हैं. जबकि, लोकसभा चुनाव के दौरान करीब 172 विधानसभा सीटों पर जदयू और राजद के उम्मीदवार भाजपा सेपीछे रहे थे. लेकिन, दोनों दलों का तर्क है कि लोकसभा चुनाव के बाद से भाजपा का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है.
हमारी गलतियों से भाजपा मजबूत हुई. झारखंड में हमारी धारा की पार्टियां अलग-अलग लड़ीं, इसलिए हम फेल हुए. बिहार में हम सब मिल कर लड़ेंगे, सामाजिक न्याय की ताकतें एकजुट होंगी और भाजपा की हवा निकल जायेगी.
लालू प्रसाद, राष्ट्रीय अध्यक्ष, राजद

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