पटना : शहर में हर दूसरे दिन सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो रही है. वर्ष 2019 में शहर के तीन ट्रैफिक थानों गांधी मैदान, जीरो माइल और सगुना मोड़ में सड़क दुर्घटना के 460 मामले दर्ज हुए. इनमें 171 की मौत हो गयी, जबकि 286 जख्मी हुए. पिछले दो वर्षों की तुलना में यह अधिक है. वर्ष 2018 में 347 सड़क दुर्घटना में 139 लोगों की मौत हुई, जबकि 2017 में 400 सड़क दुर्घटनाओं में 132 लोगों की मौत हुई. 2018 की तुलना में 2019 में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में 32 फीसदी और मृतकों की संख्या में 23 फीसदी का इजाफा हुआ है.
इसी तरह वर्ष 2017 की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में 15 फीसदी और मृतकों की संख्या में 29 फीसदी की वृद्धि हुई है. बाढ़, मोकामा, बख्तियारपुर और फतुहा जैसे पटना के आसपास के क्षेत्रों में हर दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और उसमें होने वाली मौतों को यदि इन आंकड़ों में जोड़ दिया जाये, तो पटना जिले में सड़क दुर्घटना के कारण हर दिन जख्मी होने या मरने वालों की संख्या तीन तक पहुंच जायेगी.
50% से अधिक मामलों में ब्रेन इंज्यूरी बन रही दुर्घटना में मौत की वजह
पटना में सड़क दुर्घटना के 50 फीसदी से अधिक मामलों में ब्रेन इंज्यूरी मौत की वजह बन रही है. वर्ष 2019 में सड़क दुर्घटना में शहर के 171 लोगों की मौत हुई. इनमें 90 ऐसे थे जिन्होंने सीट बेल्ट नहीं लगा रखी थी या हेलमेट नहीं पहन रखा था. नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2018 में बिहार में 2678 ऐसे लोगों की मौत हुई, जिन्होंने हेलमेट पहना होता तो शायद उनकी जिंदगी बच जाती.
