पटना : राज्य भर में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने में देर करना अधिकारियों को महंगा पड़ेगा. सरकार ने घटना के तुरत बाद अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है. बुधवार को अधिवेशन भवन में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए विभागीय मंत्री डाॅ रमेश ऋषिकेश ने यह जानकारी दी.
उन्होेंने कहा कि जल-जीवन-हरियाली के तहत वैसे कमजोर वर्गों के लोगों को नहीं हटाया जायेगा, जो पइन, आहर, तालाब के किनारे वर्षों से बसे हुए हैं. इन सभी को हटाने के पहले उनको नयी जगह दी जायेगी. जिन लोगों को पूर्व से जमीन मिली हुई है, उनको जमीन पर कब्जा दिलाया जाये.
विभाग के सचिव प्रेम सिंह मीणा ने कहा कि अत्याचार निवारण कानून के तहत एससी-एसटी थानों के अलावे सामान्य थानों में भी मामले दर्ज हो रहे हैं. यह अच्छी बात है कि पदाधिकारी एससी-एसटी वर्ग के लिए ईमानदारी से काम कर रहे हैं, लेकिन आज भी दोषियों को सजा दिलाने में हमारी गति धीमी है. इसे तेज करने की जरूरत है. उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई करने के लिए समय से चार्जशीट दायर करने और मामले का जांच प्रतिवेदन तय समय पर देने का निर्देश दिया.
एडीजी मुख्यालय विनय कुमार ने कहा कि पटना, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी और सारण में सबसे अधिक मामले लंबित हैं. हाल में 70 से अधिक डीएसपी पर जांच रिपोर्ट देने में देर करने के मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है, लेकिन हमें भी कार्रवाई करके खुशी नहीं होती है. इसलिए एक्ट को समझें और तय समय पर कार्रवाई को पूरा करें, ताकि दोषियों को सजा मिल सके. कार्यक्रम में पुलिस पदाधिकारियों को अत्याचार अधिनियम कानून के बारे में जानकारी दी गयी.
