पटना : पीरबहोर थाना क्षेत्र स्थित गोविंद मित्रा रोड में बीते 21 नवंबर को पकड़ी गयी नकली व लावारिस दवा मामले में कई ड्रग इंस्पेक्टरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. दवा छापेमारी के बाद आरोपितों पर कार्रवाई नहीं करने के बाद थाने की ओर से एफआइआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है. पुलिस छापेमारी वाले दिन का सीसीटीवी फुटेज निकाल कर संबंधित अधिकारियों से पूछताछ करेगी. पुलिस की मानें, तो गोविंद मित्रा रोड में कई कार्टून लावारिस दवाओं को नकली दिखाया गया व जब एफआइआर करने की बात कही गयी तो वे कन्नी काटने लगे.
आइओ वर्ल्डजीत कुमार ने बताया कि जब्त दवाओं की सूची बनाकर औषधि विभाग के अधिकारियों को मुहैया करा दी गयी है. लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद अभी तक दवाओं का पक्का बिल ड्रग इंस्पेक्टरों की ओर से थाने में मुहैया नहीं कराया गया है.
अगर जब्त दवाओं की बिल की पर्ची मुहैया नहीं करायी गयी, तो अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर मामले की जांच की जायेगी. वहीं सूत्रों की मानें, तो दवा माफिया व ड्रग इंस्पेक्टरों की मिलीभगत से दवाओं का जखीरा गोविंद मित्रा रोड में रख दिया गया, इसके बाद माफियाओं को ब्लैक मेल करते हुए कार्रवाई की बात कही गयी. लेकिन मिलीभगत के बाद दवाओं को लावारिस बता कर थाने में जब्ती कर उसको लावारिस बता दिया गया.
दवा माफियाओं से मिलीभगत के मामले में कुछ ड्रग इंस्पेक्टरों पर पीरबहोर थाने में एफआइआर दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. इस मामले में दोषी पाये गये ड्रग इंस्पेक्टरों का ट्रायल भी चल रहा है.
