पटना : जज के बेटे के अपहरण मामले में 21 वर्ष बाद सजा

पटना : जज के बेटे के अपहरण मामले में 21 साल बाद त्वरित अदालत-2 के जज मुहम्मद अब्दुल सलाम की अदालत ने शुक्रवार को तीन अभियुक्तों को दस-दस वर्षों की कठोर कारावास व 25-25 हजार अर्थदंड की सजा सुनायी. उक्त मामले में अदालत ने भादवि की धारा 364 का दोषी पाते हुए अभियुक्त गया के […]

पटना : जज के बेटे के अपहरण मामले में 21 साल बाद त्वरित अदालत-2 के जज मुहम्मद अब्दुल सलाम की अदालत ने शुक्रवार को तीन अभियुक्तों को दस-दस वर्षों की कठोर कारावास व 25-25 हजार अर्थदंड की सजा सुनायी. उक्त मामले में अदालत ने भादवि की धारा 364 का दोषी पाते हुए अभियुक्त गया के अतरी निवासी रघुनंदन प्रसाद यादव, आलमगंज, पटना निवासी दिलीप कुमार तथा विद्यापति कॉलोनी, पटना निवासी मुहम्मद जफुरूद्दीन को उक्त सजा सुनायी.
अभियुक्तों ने अपने अन्य साथियों के सहयोग से 10 मार्च, 1998 को शाम चार बजे जजेज कॉलोनी छज्जूबाग स्थित न्यायिक पदाधिकारी सुषमा सिन्हा के छह वर्षीय बेटे संतोष सिन्हा उर्फ बूटी का पिस्टल के बल पर अपहरण कर लिया था. घटना उस समय हुई थी, जब संतोष अपने आवासीय परिसर में अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था. अभियुक्त बच्चे को एक सफेद अंबेसडर कार से अपहरण कर भाग गये. घटना के समय सुषमा सिन्हा, पटना सिविल कोर्ट में न्यायिक कार्य कर रही थीं.
घटना की सूचना पर पटना पुलिस व परसा बाजार की पुलिस ने बच्चे के साथ उसी दिन अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया और बच्चे को उनके पिता को सौंप दिया था. उक्त घटना पर सुषमा सिन्हा के फर्द बयान पर आठ अभियुक्तों के खिलाफ कोतवाली में कांड संख्या 91/98 भादवि की धाराएं 364, 307,353, 34 व 27 आर्म्स एक्ट में मामला दर्ज हुआ.
सूचक ने अपनी गवाही में बताया कि अभियुक्तों ने इस घटना के पूर्व भी घटना करने का प्रयास किया था. अपहरण के दिन प्रयोग की जाने वाली अंबेसडर कार का नंबर पड़ोसियों द्वारा नोट कर लिया गया था. जो तत्काल बच्चे की बरामदगी व अभियुक्तों की गिरफ्तारी में सहायक हुई. प्रयोग की गयी अंबेसडर कार का नंबर बीएचए 581 था. उक्त मामले में अदालत ने 10 दिसंबर, 1999 को आरोप गठन किया. मामले में अपह्त बालक के साथ गिरफ्तार तीन अभियुक्तों को अदालत ने दोषी पाते हुए उपरोक्त सजा दिया. जबकि, मामले के अन्य अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया. जज के बेटे के अपहरण के मामले की सुनवाई लगभग 21 वर्ष चली, अब इसमें सजा हुई है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >