पटना : पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों से 25 से कम उम्र के अपराधियों की सूची मांगी है. राज्य में पिछले एक-दो वर्ष के दौरान लूट, छिनतई, डकैती व रेप के अलावा हत्या के भी कई मामलों में किशोरों या नाबालिगों की संलिप्तता बढ़ी संख्या में देखने को मिली है.
खासकर बैंक या सोना-चांदी के दुकानों की लूटी या डकैती के मामलों में 25 वर्ष या 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों की संख्या काफी देखी गयी है. इसके मद्देनजर पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को अपने-अपने जिलों में होने वाले इन अपराधों की समीक्षा करने को कहा.
इसमें शामिल नाबालिगों या किशोरों की संख्या के साथ उनके बारे में एकत्र की गयी सभी अहम जानकारी एकत्र करके भेजने को कहा. आइजी (कमजोर वर्ग) को इन आंकड़ों को संग्रहित कर समेकित रिपोर्ट तैयार करना है.
इससे यह पता चल सकेगा कि गंभीर किस्म के सभी अपराधों में किस तेजी से किशोरों के शामिल होने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है. इस रिपोर्ट की मदद से युवाओं में अपराध के प्रति तेजी से बढ़ती प्रवृत्ति और इसके कारणों को पता किया जा सकता है. साथ ही ऐसे अपराधियों से निबटने और इन पर नकेल कसने के लिए अलग से रणनीति तैयार की जा सकती है.
साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर नाबालिग घोषित करने के उम्र को घटाने की तेजी से चल रही बहस को भी सार्थकता प्रदान करने में मदद मिलेगी.
मुख्य रूप से निर्भया कांड के बाद जुवेनाइल की परिभाषा बदलते हुए इसके लिए उम्र सीमा को 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष करने की बहस तेजी से शुरू हो गयी है. वर्तमान में किसी गंभीर किस्म या जघन्य तरह के आपराधिक मामले में किशोर को अधिकतम तीन साल की ही सजा देने का प्रावधान है. इस वजह से इसमें काफी समस्या आ रही है.
इसके अलावा जिलों से यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों में सघन जांच करें और यह पता करें कि ऐसे किसी संगीन अपराधों में शामिल किशोरों से इसे कोई करवा रहा है या कोई इस तरह का गैंग है, जो किशोरों को ऐसे अपराध कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. इन तमाम बातों का उल्लेख रिपोर्ट में करने के लिए कहा गया है.
