बेहतर होंगी सिंचाई सुविधाएं, जल संसाधन विभाग कर रहा है तैयारी
पटना : राज्य के बड़े बराज, डैम व झीलों से सिंचाई सुविधाएं विकसित करने के साथ-साथ उनका सौंदर्यीकरण किया जायेगा. वहां पर्यटकों के लिए भी सुविधाएं विकसित की जायेंगी. पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकि नगर में गंडक नदी से इसकी शुरुआत हो चुकी है. अब इस योजना पर राज्य के अन्य क्षेत्रों में काम करने के लिए जल संसाधन विभाग तैयारी कर रहा है.
पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकि नगर में गंडक नदी के किनारे रिवर फ्रंट बनाया गया है. सुबह की सैर के लिए इसे बेहतर माना गया है. गंडक नदी में बोटिंग की व्यवस्था की गयी है. वहीं गंडक के किनारे ही इको पार्क और मेडिटेशन सेंटर बनाया गया है. इसी तरह की शुरुआत इंद्रपुरी बराज, खड़गपुर झील व चांदन डैम पर करने की योजना है. हाल ही में खड़गपुर झील में गाद की सफाई की गयी है. इस झील से सिंचाई के पटवन व आसपास के इलाके में पीने के पानी की आपूर्ति की जाती है. यहां जल संसाधन विभाग का एक गेस्ट हाउस है. झील का एरिया बड़ा है. भविष्य में बोटिंग की योजना है.
इंद्रपुरी बराज की डीपीआर अंतिम चरण में
जल संसाधन विभाग के सूत्रों का कहना है कि इंद्रपुरी बराज की डीपीआर अंतिम चरण में है. इसका भी सौंदर्यीकरण किया जायेगा जिससे कि पर्यटक यहां आ सकें. इस बराज के साथ इससे अतिरिक्त नहर निकाल कर इसका पानी सोन नहर को उपलब्ध करवाने की योजना है. इसका मकसद इस साल के अंत तक राज्य के आठ जिलों की सिंचाई सुविधा बेहतर करना है. इसमें कैमूर, रोहतास, भोजपुर, बक्सर, औरंगाबाद, गया और अरवल शामिल हैं. इसे 2020 में ही पूरा करने की योजना है. ठीक इसी तरह की योजना बांका जिले में चांदन डैम के लिए है. इसका डी शिल्टेशन किया जायेगा. इसके लिए जल संसाधन विभाग, पथ निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग और खान एवं भूतत्व विभाग के आला अधिकारियों ने निरीक्षण किया है. यहां से गाद के रूप में निकलने वाले बालू का इस्तेमाल करने की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है.
