पटना : पटना विश्वविद्यालय के लिए वर्ष 2019 कई मामलों में विवि के लिए अच्छा रहा, तो वहीं लाख प्रयासों के बाद भी विवि को नैक में ‘ए प्लस’ ग्रेड नहीं मिलना काफी खल गया. इस कारण डीडीइ को भी मान्यता मिलने की उम्मीद कम ही लग रही है.
हालांकि अब विवि नेशनल रैंकिंग में आने की तैयारी कर रहा है. सेंट्रल यूनिवर्सिटी के दर्जे के लिए उपराष्ट्रपति द्वारा संज्ञान लिया जाना विवि के लिए सुखद रहा. इस वर्ष सबसे अधिक 48 हजार फॉर्म आये जो पिछले वर्ष की तुलना में 32 हजार अधिक हैं, जबकि स्वीकृत सीटें 5500 हैं. जहां अन्य विवि छात्र संघ चुनाव कराने में असफल रहे, वहीं पीयू ने लगातार तीसरे वर्ष छात्र संघ चुनाव कराया गया.
पटना कॉलेज को सी ग्रेड मिलना निराश कर गया
पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रास बिहारी सिंह के आने के बाद विवि में काफी काम हुआ है. नैक से पीयू को ‘बी प्लस’ ग्रेड मिला है. दो कॉलेजों को भी नैक ग्रेड मिला. इसमें पटना कॉलेज को ग्रेड ‘सी’ मिलना निराश कर गया. वहीं, लॉ कॉलेज को ‘बी’ ग्रेड मिला. बीएन कॉलेज अभी प्रयासरत है.
सायंस कॉलेज व मगध महिला कॉलेज में नैक टीम विजिट कर चुकी है. वाणिज्य कॉलेज की एसएसआर नैक के लिए एप्रूव्ड नहीं होना, जगह की कमी और नये भवन का नहीं बनना छात्रों को काफी खल रहा है. विकास को लेकर कई योजनाएं पाइपलाइन में हैं. जैसे परीक्षा भवन, बीएन कॉलेज, सायंस कॉलेज समेत कई जगह हो रहा इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम होना है.
पटना विश्वविद्यालय
आने वाले वर्ष में चुनौतियां
– विवि विकास में रुसा द्वारा मिलने वाले 20 करोड़ रुपये का व्यय
– क्लास रूम टीचिंग के साथ काउंसेलिंग, प्लेसमेंट, ग्लोबल एक्सपोजर के रूप में विकसित करना
– यूएमआइएस को सही तरीके से लागू करना
– पूर्ववर्ती छात्रों को विवि के विकास के लिए प्रेरित करना व सहयोग लेना
– रेगुलर यूजी कोर्स में सीबीसीएस लागू करना
– वाणिज्य कॉलेज व पीजी विभागों को नये भवन में शिफ्ट करना
– वोकेशनल कोर्स को सायंस कॉलेज में शिफ्ट कर एक छत के नीचे संचालन
– स्टूडेंट्स फेसिलिटेशन सेंटर भवन
