पटना : पूर्णिया, मगध, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) और जयप्रकाश विश्वविद्यालय अभी तक अपने शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों की रिक्तियों का ब्योरा उच्च शिक्षा विभाग को नहीं दे सके हैं.
लिहाजा शिक्षा विभाग प्राध्यापकों और अन्य पदों के लिए नियुक्तियों की कवायद शुरू नहीं कर पा रहा है. हालात ये हैं कि तमाम नोटिसों और जतन के बाद भी उच्च शिक्षा विभाग इन विश्वविद्यालयों से रिक्तियों का ब्योरा हासिल नहीं कर सका. हार कर अब इन विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की मीटिंग अपर मुख्य सचिव आरके महाजन से करने का निर्णय लिया गया है. बैठक संभवत: अगले हफ्ते होगी.
राजभवन ने विश्वविद्यालय में रिक्त स्थान भरने के निर्देश हालिया बैठकों में पहले ही दे रखा है. अपर मुख्य सचिव आरके महाजन भी इन विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रारों से पहले ही नाराज चल रहे हैं. इसलिए अगले हफ्ते होने वाली बैठक विशेष अहम मानी जा रही है. प्रदेश के सभी 12 पारंपरिक विश्वविद्यालयों में 14 हजार से अधिक पदों की नियुक्ति की जानी है. इनमें संभवत: आठ हजार से अधिक रिक्तियां केवल सहायक प्राध्यापकों की हैं.
विश्वविद्यालयों को अपनी रिक्तियों का ब्योरा देने की अंतिम समय सीमा 25 दिसंबर भी निकल चुकी है. इससे पहले समय सीमा तीन बार बढ़ायी गयी. सहायक प्राध्यापकों की कमी से पढ़ाई बाधित हो रही है. सहायक प्राध्यापकों की नियुक्तियां समय पर हो सकें, इसके लिए विभाग ने बाकायदा विश्वविद्यालय सेवा आयोग का गठन भी किया है. आयोग का गठन हुए एक अरसा बीत चुका है. अभी तक उन्हें रिक्तियों का ब्योरा नहीं दिया जा सका था. शुरुआत में लक्ष्य रखा था कि वर्ष 2020 के शैक्षणिक सत्र से पहले नियुक्तियां कर ली जायेंगी.
वर्तमान स्थिति है कि रिक्तियों का मामला लंबित हो सकता है. शिक्षा विभाग ने बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग नियमावली 2018 को मंजूरी दे रखी है. 2014 में सरकार ने आयोग को विश्वविद्यालय शिक्षकों के 3354 रिक्त पदों पर नियुक्ति की अधियाचना भेजी थी. इसमें से बीपीएससी ने दो हजार पदों पर नियुक्तियां कर दी हैं.
