पटना : शहर में सीसीए व राष्ट्रीय रजिस्टर कानून (एनआरसी) के विरोध में हिंसक प्रदर्शन करने वाले आरोपितों की सूची तैयार कर ली गयी है. पटना पुलिस प्रदर्शन में शामिल अलग-अलग पार्टी के बड़े नेताओं व उपद्रवियों का नाम अब थानों के गुंडा रजिस्टर में दर्ज करने जा रही है.
मुख्यालय के आदेश पर एसएसपी ने सभी थानों को फरमान जारी करते हुए कहा कि प्रदर्शन के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले आरोपितों की सीसीटीवी फुटेज से पहचान कर गुंडा रजिस्टर में नाम दर्ज किया जाये. प्रदर्शन के दौरान आपराधिक गतिविधियों में शामिल आरोपितों के नामों के लिए थानों में एक रजिस्टर तैयार की गयी है. जिसे गुंडा-पंजी रजिस्टर कहा जाता है.
आमतौर पर डकैती, लूट, सांप्रदायिक कांड, विधि व्यवस्था को तोड़ने, मादक पदार्थ की तस्करी, विस्फोटक रखने, आर्म्स एक्ट व छेड़खानी के आरोपितों पर लगते हैं. बिहार पुलिस मैनुअल की धारा 1315 व 1316 के तहत आरोपितों के नाम दर्ज किये जायेंगे. जानकारों की मानें, तो एक बार गुंडा रजिस्टर में नाम दर्ज हो जाने के बाद आरोपित सामान्य नागरिक आदमी नहीं रह जाता. और नागरिक अधिकारों से वंचित हो जाता है.
पुलिस के हाथ अब भी खाली
15 दिसंबर को कारगिल चौक पर हिंसक प्रदर्शन करने वाले सिर्फ छह आरोपितों को ही पुलिस ने गिरफ्तार किया है. जबकि, एक हजार अज्ञात व 50 नामजद लोगों के खिलाफ गांधी मैदान थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था. 10 दिन गुजर जाने के बाद भी आरोपित फरार है. प्रदर्शन के दौरान हिंसक लोगों ने पुलिस व आम लोगों पर खुलेआम फायरिंग कर दो पुलिस चेक पोस्ट को आग के हवाले कर दिया था.
मीडिया कर्मियों को निशाना बनाते हुए दर्जनों लोगों की गाड़ियों को फूंक दिया गया था. इसी तरह 21 नवंबर को बिहार बंद के दौरान प्रदर्शन करने वाले लोगों को कारगिल चौक पर आगजनी व मारपीट करने आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं की गयी.
