पटना : राज्य सरकार को शराबबंदी मामले में जब्त गाड़ियों पर 45 दिनों के अंदर फैसला लेना होगा. पटना हाइकोर्ट ने इसकी समय सीमा तय कर दी है. सोमवार को इस मामले करीब 200 याचिकाओं की एकसाथ सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस कानून के तहत जब्त वाहनों के मामले में वाहन मालिक 15 दिनों के अंदर संबंधित डीएम को आवेदन दे सकते हैं.
शराबबंदी में जब्त गाड़ियों पर 45 दिनों में होगा फैसला : हाइकोर्ट
पटना : राज्य सरकार को शराबबंदी मामले में जब्त गाड़ियों पर 45 दिनों के अंदर फैसला लेना होगा. पटना हाइकोर्ट ने इसकी समय सीमा तय कर दी है. सोमवार को इस मामले करीब 200 याचिकाओं की एकसाथ सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया […]

आवेदन पर संबंधित डीएम को 30 दिनों के अंदर सुनवाई कर उचित आदेश पारित करना होगा. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि उन्हें लगता है कि वाहन जब्ती नहीं की जा सकती है तो उसे उक्त अवधि में रिलीज करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को देना होगा. अगर इसके बाद भी वाहन को मुक्त नहीं किया जाता है तो वाहन मालिक मुआवजा के लिए दावा कर सकते हैं.
गौरतलब है कि पटना हाइकोर्ट समेत राज्य की अन्य अदालतों में दो लाख से भी ज्यादा शराबबंदी के मामले सुनवाई के लिए लंबित हैं. वहीं, पांच अप्रैल, 2016 को राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद करीब 10 हजार गाड़ियां जब्त हुई है. कोर्ट द्वारा समय सीमा तय करने से इन मामलों का त्वरित निष्पादन संभव हो सकेगा.
आहर-तालाब से अवैध कब्जा हटाये सरकार
पटना : पटना हाइकोर्ट ने राज्य के विभिन्न जिलों में जलस्त्रोतों पर किये गये अवैध कब्जे को 20 जनवरी तक हटाने का आदेश दिया है. हाइकोर्ट ने इससे संबंधित सभी अधिकारियों को कहा कि निर्धारित समय सीमा के अंदर अवैध कब्जे को हटाकर पूरी जानकारी 20 जनवरी तक कोर्ट को दी जाये.
मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने राम पुनीत राय की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. सुनवाई के दौरान पूर्णिया जिले के अधिकारियों ने छह जनवरी तक कब्जा हटाने का आश्वासन कोर्ट को दिया. मामले की अगली सुनवाई छह जनवरी, 2020 को होगी.