बिहार की नयी बालू नीति को एनजीटी का ग्रीन सिग्नल

पटना : राज्य की नयी बालू नीति को एनजीटी का ग्रीन सिग्नल गुरुवार काे मिल गया. इसकी सुनवाई दो दिसंबर को पूरी हुई थी. एनजीटी ने नयी बालू नीति को सही और पर्यावरणीय अनुकूल बताकर इसके खिलाफ दायर अन्य सात केस भी खारिज कर दिया है. इसके साथ ही नये साल में बालू की उपलब्धता […]

पटना : राज्य की नयी बालू नीति को एनजीटी का ग्रीन सिग्नल गुरुवार काे मिल गया. इसकी सुनवाई दो दिसंबर को पूरी हुई थी. एनजीटी ने नयी बालू नीति को सही और पर्यावरणीय अनुकूल बताकर इसके खिलाफ दायर अन्य सात केस भी खारिज कर दिया है. इसके साथ ही नये साल में बालू की उपलब्धता को लेकर गहराता संकट समाप्त हो गया है. साथ ही बालू खनन के लिए नदी घाटों की बंदोबस्ती का रास्ता साफ हो गया है.
हालांकि, एनजीटी के आदेश पर खान एवं भूतत्व विभाग ने बंदोबस्ती की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है. ऐसे में नये साल की पहली तारीख से नये बंदोबस्तधारियों के पास नदी घाटों से बालू खनन की जिम्मेदारी पांच साल के लिए आ जायेगी.
सूत्रों का कहना है कि एनजीटी के आदेश को नयी बालू नीति पर राज्य सरकार की बड़ी जीत माना जा रहा है, क्योंकि नदी घाटों की पुरानी बंदोबस्ती की समय सीमा 31 दिसंबर, 2019 को खत्म हो रही थी. वहीं, एक जनवरी, 2020 से नये बंदोबस्तधारियों को नदी घाटों के खनन की जिम्मेदारी सौंपी जानी थी.
इसके लिए नयी बालू नीति के तहत नदी घाटों की बंदोबस्ती के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू करने के लिए खान एवं भूतत्व विभाग ने 23 सितंबर, 2019 को 11 जिलों के डीएम को पत्र लिखा था. कुछ लोगों व एजेंसियों ने एनजीटी में राज्य की नयी बालू नीति को चुनौती दी और 27 सितंबर को एनजीटी के आदेश पर टेंडर की प्रक्रिया रोक दी गयी थी. अंतिम रूप से एनजीटी ने दो दिसंबर, 2019 को सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिया था. मालूम हो कि राज्य के 38 जिलों में करीब 400 घाटों की नीलामी होगी. इनमें पांच जिलों से होकर गुजरनेवाले सिर्फ सोन नद के 200 घाट शामिल हैं.
नयी बालू नीति से क्या होगा फायदा
पहले एक ही एजेंसी या व्यक्ति को कई जिलों के अनेक बालू घाटों की बंदोबस्ती दी जाती थी. इससे बालू घाटों पर उनका एकाधिकार हो गया था. इसे खत्म करने के लिए ही इसे अधिकतम दो बालू घाटों तक ही सीमित कर दिया गया है. नयी नीति के आने के बाद अधिक-से-अधिक एजेंसियों या व्यक्तियों के नामों से बालू घाटों की बंदोबस्ती की जा सकेगी. यह अनुमान है कि राज्य में इससे कम-से-कम 200 एजेंसियों या व्यक्तियों को लाभ मिलेगा. पहले 28 जिलों में सिर्फ 19 कंपनियों व व्यक्तियों को बंदोबस्ती की गयी थी. अब बाजार दर पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से बालू की खरीदारी की जा सकेगी. बारकोड, क्यूआर कोड के साथ इ-चालान जारी किया जायेगा. वहीं रियल टाइम मैनेजमेंट सिस्टम डेवलप करते हुए बालू बंदोबस्ती की मंथली रिपोर्ट जारी की जायेगी.
क्या है नयी बालू नीति
नयी बालू नीति को राज्य कैबिनेट की मंजूरी 13 अगस्त, 2019 को मिली थी. इसके अनुसार किसी निबंधित व्यक्ति या सोसाइटी को अधिकतम दो बालू घाटों या 200 हेक्टेयर के खनन क्षेत्र में से जो भी कम हो, उसकी बंदोबस्ती मिलेगी. नयी बालू नीति में एक नदी को एक इकाई माना जायेगा, लेकिन एक नदी को ही कई खंडों में बांटकर बंदोबस्ती की जायेगी.

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