पटना-गया सड़क को दुरुस्त करने का प्लान बताएं – हाइकोर्ट

पटना : पटना हाइकोर्ट ने पटना-गया सड़क की दयनीय स्थिति में सुधार लाने और फल्गू नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की योजना पर अधिकारियों को साझा कार्यक्रम बनाने का आदेश दिया. मंगलवार को इस मामले में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद नगर विकास विभाग के सचिव आनंद किशोर के साथ ही […]

पटना : पटना हाइकोर्ट ने पटना-गया सड़क की दयनीय स्थिति में सुधार लाने और फल्गू नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की योजना पर अधिकारियों को साझा कार्यक्रम बनाने का आदेश दिया. मंगलवार को इस मामले में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद नगर विकास विभाग के सचिव आनंद किशोर के साथ ही पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव, जल संसाधन व पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव, गया के डीएम, गया म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के आयुक्त, एनएचआइए के क्षेत्रीय अधिकारी और नोडल अधिकारी को कहा कि सब लोग एक साथ मिल बैठ कर पटना-गया रोड, फल्गु नदी में बढ़ रहे प्रदूषण, गया शहर के विकास, पीने के पानी की समुचित व्यवस्था और सीवरेज प्लान के साथ ही नालंदा और राजगीर के विकास के लिये मास्टर प्लान बनाकर इसकी पूरी जानकारी 20 दिसंबर तक कोर्ट को देने का निर्देश दिया.

अवमानना मामले में मुख्य सचिव से मांगा जवाब
पटना. पटना हाइकोर्ट ने अदालती आदेशों के पालन नहीं होने पर दायर होने वाले अवमानना के मामलों को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव से एक सप्ताह में जवाब तलब किया है.
मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने राज रंजन द्वारा दायर अवमानना याचिका पर अधिवक्ता उमेश कुमार मिश्र को सुनने के बाद यह निर्देश दिया. कोर्ट ने मुख्य सचिव को कहा कि संबंधित अधिकारियों और पदाधिकारियों के कारण अवमानना मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है.
अगर समय पर संबंधित अधिकारियों या पदाधिकारियों द्वारा अदालती आदेश का पालन कर दिया जाता तो इसकी संख्या नहीं बढ़ती. कोर्ट ने मुख्य सचिव से पूछा कि राज्य सरकार लिटिगेशन पॉलिसी 2011 क्यों लायी थी. क्या इसके अनुसार काम किया जा रहा है, रूल्स ऑफ एग्जीक्यूटिव बिजनेस क्या कहता है. अगर इसके अनुसार काम किया जाता तो कोर्ट में मुकदमों की संख्या कम होती.

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