सुयेब खान
मनेर : इंसानियत, मानवता व सामाजिक सद्भाव बढ़ाने की यह बेहतरीन मिसाल है. इसमें एक मुस्लिम परिवार के सदस्यों ने एक बुजुर्ग हिंदू महिला की मृत्यु पर उनका न सिर्फ हिंदू रीति-रिवाजों से दाह-संस्कार किया, बल्कि आगे दशकर्म और ब्रह्मभोज भी करने की तैयारी है. मनेर की सूफियाना तहजीब को सलामत रखने की यह पहल मीराचक मुहल्ले की है. यहां एक बुजुर्ग महिला काफी वर्षों से अकेले रहती थीं. उनके पति की मृत्यु वर्षों पूर्व हो गयी थी. महिला की कोई संतान भी नहीं थी.
बेघर यह महिला कुछ दिन पूर्व तक घूम-घूमकर कुछ सामान बेचकर किसी तरह गुजर बसर करती रही थीं. ज्यादा वृद्ध होने से महिला ने कई महीनों से सामान वगैरह बेचना बंद कर दिया था. वह मुहल्ले के घरों से मांगकर गुजर-बसर कर रही थीं. सोमवार को महिला की मृत्यु खंडहरनुमा एक घर में हो गयी. लेकिन कोई भी दाह-संस्कार के लिए आगे नहीं आया. एक दिन बाद मंगलवार को महिला के परिचित मुस्लिम व्यक्ति व काजी मोहल्ला निवासी चंदू खान को इसका पता चला़ उन्होंने तत्काल अपने भतीजे जावेद खान को बुलाया और महिला के शव के दाह-संस्कार की तैयारी की.
दोनों के आगे आते ही मोहल्ले के अन्य लोगों ने चाचा-भतीजे का सहयोग किया. इसके बाद चाचा-भतीजे ने मनेर हल्दी छपरा गंगा नदी के किनारे घाट पर हिंदू रीति-रिवाज से महिला का अंतिम संस्कार कर दिया. मुखाग्नि चंदू खान ने दी. जावेद ने कहा कि समाज का सहयोग मिला, तो हमलोग दशकर्म और ब्रह्मभोज भी करेंगे.
