पटना : डीएम कुमार रवि ने समाहरणालय के सभा कक्ष में कंबाइन हार्वेस्टर मालिकों के साथ बैठक की. इस दौरान खेत में पुआल जलाने पर रोक-थाम के मुद्दे पर बात हुई. डीएम ने कंबाइन हार्वेस्टर मालिकों को पुआल जलाने के संबंध में सरकार के निर्देशों की जानकारी दी और कहा कि किसान खेत में पुआल न जलायें, इससे खेत की उर्वरा शक्ति मर जाती है, साथ ही पर्यावरण प्रदूषित होता है.
डीएम ने कंबाइन हार्वेस्टर के मालिकों को निर्देश दिया गया कि वे सभी फसल कटाई के दौरान किसानों को पुआल (फसल के अवशेष) नहीं जलाने के लिए प्रेरित करेंगे एवं उन्होंने पुआल नहीं जलाने से संबंधित 3 बाई 4 फुट का प्रचार सामग्री हार्वेस्टर के सभी भागों पर प्रदर्शित करेंगे.
किसानों की मांग, मलचर मशीन पर बढ़ायी जाये सब्सिडी : बैठक में किसानों से पुआल न जलाने के संबंध में उनकी राय मांगी गयी. इस पर किसानों द्वारा बताया गया कि मलचर मशीन पुआल केछोटे टुकड़े कर खेत में फैलाने में सक्षम है, जो खेत की नमी को बचाने के साथ–साथ कम्पोस्ट में परिवर्तित होकर खेत की उर्वरा शक्ति को बढ़ाता है. मलचर मशीन हाईपावर (60 एचपी) केट्रैक्टर से जुड़कर चलता है. इससे पुअाल जैविक खाद्य बन जाता है. किसानों ने डीएम से अनुरोध किया कि 60 एचपी के ट्रैक्टर एवं मलचर मशीन पर अधिक से अधिक सब्सिडी देने का प्रावधान सरकार द्वारा किया जाये. डीएम ने किसानों से कहा कि किसानों की बातों को सरकार तक पहुंचायेंगे.
जैविक खाद बनाने वाले यंत्रों पर बढ़े अनुदान किसानों द्वारा पुआल को जैविक खाद्य बनाने के लिए वेस्ट डी कम्पोजर से संबंधित सामग्रियों पर डीएम से अनुदान बढ़ाने का अनुरोध किया गया. साथ ही यह भी सुझाव दिया गया कि सुपर सीडर, हैप्पी सीडर मशीनों से भी पराली को जैविक खाद्य में बदला जा सकता है. किसानों एवं जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि पराली को जैविक खाद्य में बदलने के लिए मलचर मशीन ज्यादा उपयुक्त है. सरकार द्वारा किसानों के हित में अधिक से अधिक सब्सीडी दी जाये. इस अवसर पर अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन मृत्युंजय कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी राकेश रंजन, जिला के विभिन्न प्रखंड से आये हुए 60 से अधिक किसान एवं कृषि समन्वयक उपस्थित थे.
