पटना : निजी जिंदगी में बेहद जिंदादिल, हंसमुख और मिलनसार इंसान थे वशिष्ठ बाबू

अमेरिकियों की मेहनत और अनुशासन के मुरीद थे पटना : पटना विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर रहे प्रो अरुण कुमार सिन्हा ने बताया कि दिवंगत वशिष्ठ नारायण सिंह निजी जिंदगी में बेहद जिंदा दिल इंसान थे. बेहद हंस मुख, मिलनसार और सुंदर. उनसे कोई भी प्रभावित हो सकता था. दिवंगत सिंह से एक साल जूनियर रहे […]

अमेरिकियों की मेहनत और अनुशासन के मुरीद थे
पटना : पटना विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर रहे प्रो अरुण कुमार सिन्हा ने बताया कि दिवंगत वशिष्ठ नारायण सिंह निजी जिंदगी में बेहद जिंदा दिल इंसान थे. बेहद हंस मुख, मिलनसार और सुंदर. उनसे कोई भी प्रभावित हो सकता था.
दिवंगत सिंह से एक साल जूनियर रहे प्रो सिन्हा बताते हैं कि अमेरिका से जब वे भारत लौटे ताे साइंस कॉलेज के फैराडे हाॅस्टल में उन्हें ठहराया गया. उनके दोस्तों ने उनसे अमेरिका के अनुभव पूछे. इस पर उन्होंने बड़ी गंभीरता से बताया कि अमेरिकी ध्यान से पढ़ते हैं. बहुत मेहनत करते हैं. हमें भी उनसे सीखना चाहिए. िकसी भी अच्छी चीज को कहीं से भी सीखा जा सकता है.
इसके बाद वशिष्ठ बाबू ने अमेिरका के कई रोचक प्रसंग सभी को सुनाये. इसमें वहां के युवाओं के बारे में, उनके पहनावे के बारे में तमाम रुिचकर प्रसंग थे. बाद में इस पर खूब हंसी-मजाक हुआ था. इसके अलावा उन्होंने अपने दोस्तों को दूसरे किस्से भी सुनाये. सिन्हा बताते हैं कि उसी हॉस्टल में वे काफी समय तक रहे. यहीं उनके पिता गांव से उनके लिए अच्छे-अच्छे फल लाते थे. पिता का उन पर बेहद स्नेह था. घंटों बाप-बेटे बतियाते.
शिक्षक मनोज कुमार
डे ने निखारी थी वशिष्ठ बाबू की प्रतिभा
मुख्य सचिव स्तर के रिटायर अधिकारी विजय प्रकाश ने बताया कि वशिष्ठ
नारायण की मेधा को नेतरहाट आवासीय स्कूल में गणित के शिक्षक मनोज कुमार डे ने निखारा था. वे बताते हैं कि डे के पढ़ाने का तरीका ही ऐसा था कि थोड़ा सा मेहनती बच्चा गणित का विद्वान बन सकता था. प्रकाश बताते हैं कि नेतरहाट अावासीय विद्यालय में मनोज कुमार डे खुद न पढ़ाकर बच्चों से पढ़वाते थे. वे केवल समस्या आने पर सहयोग करते थे.
इस स्कूल में विषयों की केवल स्तरीय किताबों की पढ़ाई होती थी. कोर्स की किताबों पर बहुत कम ध्यान होता था. स्थिति ये बनती थी कि कक्षा ���ात से आठ में ही बच्चा बीएससी का गणित पढ़ लेता था. इसका फायदा पटना सायंस कॉलेज में वशिष्ठ को मिला. उन्हें हायर सेकेंडरी से सीधे बीएससी अंतिम वर्ष की परीक्षा दिलायी गयी.
भारत ताकतवर देश होता तो अमेरिकी जरूर सोचते
अमेरिकी प्रवास के दौरान दिवंगत डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह ने अपने दोस्तों को कुछ पत्र लिखे थे. उन पत्रों के हवाले से बताया गया कि दिवंगत सिंह अमेरिका की संस्कृति से ऊब गये थे. वे लिखते हैं कि” भारत के विषय में यहां के अधिकतर लोग कुछ नहीं सोचते.
भारत अगर धनी और ताकतवर देश होता तो वे बहुत सोचते. तब भी कुछ लोग हैं जो भारत के बारे में सहानुभूति रखते हैं. यहां की आम जनता भारत की जनता से ज्यादा संपन्न है और कई दृष्टियों में ज्यादा सुखी है, किंतु कुछ ख्याल से कम सुखी है. मैं तो देश अवश्य लौटूंगा,लेकिन कुछ काल के बाद. बीच में नेतरहाट स्कूल को कुछ प्रतिभाशाली छात्र उत्पन्न करने चाहिए, जो भविष्य में गणितज्ञ और वैज्ञानिक बन सकें ” .
पटना साइंस कॉलेज करायेगा उनके रिसर्च पेपर का अध्ययन
पटना साइंस कॉलेज के प्राचार्य डा के सी सिन्हा ने बताया कि पटना साइंस कॉलेज दिवंगत वशिष्ठ नारायण सिंह के रिसर्च पेपर पर अध्ययन करायेगा. उनके कृतित्व से गणित के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अवगत कराया जायेगा. डा सिन्हा ने बताया कि इसके पीछे हमारी मंशा है कि उनके काम को नयी पीढ़ी आगे बढ़ायें .

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