पटना : राजीव नगर थाने की महिला दारोगा व दुष्कर्म के केस की अनुसंधानकर्ता पूनम रानी को एसएसपी गरिमा मलिक ने बुधवार को सस्पेंड कर दिया. पूनम रानी पर आरोप है कि 12 साल की नाबालिग बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के केस के चार्जशीट को दस दिनों तक दबाये रखा और इसका लाभ आरोपित संतोष साह को मिल गया.
और, फिर जमानत हो गयी. चार्जशीट को समय पर नहीं जमा करने का मामला सामने आने पर एसएसपी ने एएसपी विधि व्यवस्था स्वर्ण प्रभात को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था.
इस पर एएसपी ने अपनी जांच रिपोर्ट बुधवार की शाम एसएसपी को सौंप दी. रिपोर्ट में साफ तौर पर अनुसंधानकर्ता की गलती सामने आयी और फिर एसएसपी ने कार्रवाई कर दी. एसएसपी ने बताया कि अनुसंधानकर्ता की गलती सामने आयी है और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है. साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी चलायी जायेगी. इस मामले में यह स्पष्ट है कि उन्होंने दस दिनों तक चार्जशीट की फाइल को दबाये रखा था.
चार अक्तूबर को जमा करना था चार्जशीट, किया गया 14 अक्तूबर को
चार्जशीट को केस दर्ज होने के 90 दिनों के अंदर दायर करना था. इसके लिए चार्जशीट चार अक्तूबर को पूरी प्रक्रिया कर न्यायालय में जमा करने के लिए दे दिया गया था. लेकिन उस दिन चार्जशीट नहीं की गयी और 14 अक्तूबर को दस दिनों बाद न्यायालय में जमा किया गया. इसका लाभ आरोपित को मिला और उसकी जमानत 12 अक्तूबर को हो गयी.
नौ जुलाई को राजीव नगर थाने में दर्ज हुई थी दुष्कर्म की प्राथमिकी : राजीव नगर इलाके में मोतिहारी निवासी संतोष साह ने अपने पड़ोस की नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया था और इस संबंध में नौ जुलाई को प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.आरोपित संतोष साह को पुलिस ने पकड़ कर जेल भेज दिया था. लेकिन अनुसंधानकर्ता की लापरवाही के कारण आरोपित को न्यायालय से जमानत मिल गयी.
