गड़बड़ी मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई
पटना : आयकर विभाग ने निजी संस्थान, ट्रस्ट या एनजीओ पर सख्त नजर रखनी शुरू कर दी है. इसमें बिहार या राज्य के बाहर से रजिस्ट्रेशन कराकर काम करने वाले दोनों तरह के संस्थान शामिल हैं. ऐसे सभी संस्थान जिनका लेन-देन संदिग्ध पाया गया है या जिन्होंने अपने नाम पर करोड़ों की संपत्ति बना रखी है, वे खासतौर से आयकर के रडार पर हैं. संदिग्ध लेन-देन को लेकर अब तक कई एनजीओ की जांच हो चुकी है, जिसमें करीब एक दर्जन ऐसे निजी संस्थानों की गतिविधि संदिग्ध पायी गयी है. ऐसे संस्थानों की जांच विभागीय स्तर पर अभी चल ही रही है. फिलहाल इनसे जुड़े सभी मामलों की गहन जांच चल रही है.
अब तक की जांच में यह बात सामने आयी है कि राज्य में विभिन्न योजनाओं या क्षेत्रों में काम करने वाली निजी संस्थाएं अपने आप को नो प्रॉफिट-नो लॉस वाले संस्थान दिखाते हुए आयकर विभाग से टैक्स देने से मुक्त होने का प्रमाण-पत्र हासिल कर लेते हैं. परंतु इसकी आड़ में करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन किया जाता है. साथ ही ब्लैक मनी को व्हाइट करने का भी खेल बड़े स्तर पर चलता है. अपनी वास्तविक कमाई को छिपा रहे हैं
कुछ एनजीओ आम लोगों से चंदे के पैसे या क्रॉउड फंडिंग के नाम पर बड़ी संख्या में ब्लैक मनी की फंडिंग करवा रहे हैं और फिर इसे खर्च के रूप में दिखाकर टैक्स देने से बच रहे हैं. कुछ एनजीओ ने जीरो रिटर्न फाइल किया है और अपनी वास्तविक कमाई को छिपा लिया है.
इन पैसों का निवेश अन्य दूसरे स्थानों में कर दिया है. इस तरह से समाजसेवा की आड़ में टैक्स की छूट भी ले रहे हैं और गलत पैसे का सही तरीके से ठिकाने भी लगा देते हैं. हाल में बोधगया में एक ऐसे ही एनजीओ की आड़ में एक व्यक्ति ने अपने नाम पर करोड़ों की बेनामी संपत्ति लिखवा ली थी, जिसे आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति एक्ट के तहत जब्त किया था.
