जीपीओ के ये कर्मी बनाये गये अभियुक्त
पटना : जीपीओ (प्रधान डाकघर) में हुए घोटाले की गहन जांच सीबीआइ ने शुरू कर दी है. अब तक हुई जांच में सीबीआइ ने पांच कर्मियों को दोषी पाया है और इन्हें नामजद अभियुक्त बनाते हुए एफआइआर भी दर्ज की गयी है. इस एफआइआर में कुछ अन्य अज्ञात लोगों को भी अभियुक्त बनाया गया है. फिलहाल मामले की तफ्तीश जारी है और इसमें जल्द ही अन्य कई लोगों के नाम भी सामने आने की संभावना है.
सीबीआइ की पटना शाखा को जीपीओ में हुए घोटाले की लिखित शिकायत चीफ पोस्टमास्टर राजदेव प्रसाद ने आठ अगस्त, 2019 को की थी. इसके बाद पूरे मामले की तहकीकात शुरू की गयी थी. सीबीआइ ने सभी अभियुक्तों के खिलाफ फर्जीवाड़ा, जालसाजी, साजिश, लोगों की राशि का गबन करने समेत ऐसे अन्य गंभीर आरोप लगाये हैं.
इन आइपीसी की धारा-409 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है, जिसका मतलब लोक सेवक की तरफ से विश्वास का आपराधिक हनन करना है. इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण निरोध अधिनियम (पीसी एक्ट) की धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. इसके तहत भ्रष्टाचार के माध्यम से कमायी गयी आरोपितों की संपत्ति भी जब्त की जा सकती है. केंद्रीय एजेंसी ने अब तक की जांच में पाया कि जीपीओ में जमा होने वाले आम लोगों के रुपये को अपने खाते में ट्रांसफर कर लेते थे और इसका गलत तरीके से उपयोग करते थे. इसके अलावा इन लोगों ने फर्जी कागजात के आधार पर बड़ी संख्या में अवैध निकासी भी कर ली थी.
