अब नीट से ही मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन

पटना : मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए अब एक टेस्ट ही होगा. एम्स और जिपमर (जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) के लिए अब स्टूडेंट्स को अलग-अलग टेस्ट नहीं देना पड़ेगा. यह 2020 में लागू हो जायेगा. नये नियम के अनुसार 2020 में देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स में […]

पटना : मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए अब एक टेस्ट ही होगा. एम्स और जिपमर (जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) के लिए अब स्टूडेंट्स को अलग-अलग टेस्ट नहीं देना पड़ेगा. यह 2020 में लागू हो जायेगा. नये नियम के अनुसार 2020 में देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स में नीट के जरिये ही प्रवेश होगा. अभी तक एम्स और जिपमर को छोड़कर बाकी मेडिकल कॉलेजों में नीट से दाखिला होता था.

नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) एक्ट लागू होते ही एम्स और जिपमर समाप्त हो जायेगा. इसे 2020 में लागू कर दिया जायेगा. इसका मतलब है कि अभी से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स को अब एम्स, जिपमर के लिए अगल-अलग फॉर्म नहीं भरना होगा. नीट के स्कोर पर ही कॉलेज का आवंटन होगा.
गौरतलब है कि अभी तक एम्स और जिपमर खुद की एडमिशन के लिए परीक्षा आयोजित करता था. नीट के आधार पर ही विदेश के मेडिकल कॉलेजों में भी एडमिशन होगा. नये नियम के बने एक्ट में चिकित्सा शिक्षा, पेशे और संस्थानों के सभी पहलुओं के विकास और विनियमन के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की जगह नेशनल मेडिकल कमीशन स्थापित होगा.
एनएमसी के तहत निजी मेडिकल कॉलेजों और डीम्ड यूनिवर्सिटीज में 50 फीसदी सीटों की फीस तय करने को लेकर भी गाइडलाइंस बनेगी. सरकार के आदेश का पालन नहीं करने वाले कॉलेजों को चेतावनी भी दी जायेगी और उन पर फाइन भी लगेगा. इसके बाद बात नहीं मानेंगे तो अंत में उनकी मान्यता रद्द कर दी जायेगी.
यह बेहतर पहल, स्टूडेंट्स नहीं होंगे परेशान
नये फैसले पर गोल इंस्टीट्यूट के मैनेजिंग डायरेक्ट बिपिन कुमार कहते हैं कि यह बेहतर फैसला है. स्टूडेंट्स को फायदा मिलेगा. अब तीन अलग-अलग एग्जाम नहीं देने होंगे. तीन तरह के पैटर्न को ध्यान नहीं देना होगा. इसके साथ सीटें ब्लॉक करने की समस्या समाप्त हो जायेगी. पहले स्टूडेंट्स सीट ब्लॉक करके रखते थे.
नीट में रैंक आने पर एम्स का इंतजार करते थे. इस कारण सीटें ब्लॉक रहती थीं. अब यह परेशानी नहीं होगी. सीट एलोकेशन का फायदा मिलेगा. स्टूडेंट्स को थोड़ी परेशानी रहेगी कि अब एक एग्जाम से ही उनका रैंक तय हो जायेगा. जबकि पहले नीट में अच्छा नहीं कर पाये तो एम्स में कई लोग बेहतर कर लेते थे.

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