पटना : कलेक्ट्रिएट भवन तोड़ने पर कोर्ट की रोक

पटना : पटना हाइकोर्ट ने पटना कलेक्ट्रिएट भवन को अगले आदेश तक तोड़ने पर रोक लगा दिया है. एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश शिवाजी पांडेय और न्यायाधीश पार्थ सारथी की खंडपीठ ने आदेश दिया है कि अगले आदेश तक डीएम कार्यालय काे नहीं तोड़ा जाये. कोर्ट ने राज्य सरकार और पटना नगर […]

पटना : पटना हाइकोर्ट ने पटना कलेक्ट्रिएट भवन को अगले आदेश तक तोड़ने पर रोक लगा दिया है. एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश शिवाजी पांडेय और न्यायाधीश पार्थ सारथी की खंडपीठ ने आदेश दिया है कि अगले आदेश तक डीएम कार्यालय काे नहीं तोड़ा जाये.
कोर्ट ने राज्य सरकार और पटना नगर निगम को निर्देश दिया कि वह इस मामले में संयुक्त रूप से चार सप्ताह में हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करे. कोर्ट को याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि पटना के कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण भवनों को तोड़ दिया गया है और कई भवनों को तोड़ा जा रहा है, इसमें जिला जज, एसपी भवन भी शामिल हैं.
राज्य सरकार और नगर निगम के हलफनाम दायर होने पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी. प्रभात खबर ने 09 जुलाई 2019 के अंक में कलेक्ट्रिएट सहित कई हेरिटेज भवनों को तोड़े जाने को लेकर चिंता जतायी थी.
डचों ने कराया था बिल्डिंग का निर्माण
उच्च स्तरीय बैठक कर लिया गया था
तोड़कर नया भवन बनाने का निर्णय
जानकारों की मानें तो 17 वीं सदी मेें बिहार में कारोबार के लिए आये डचों ने 1824 में पटना कलेक्ट्रिएट भवन को बनाया था. अभी 12 एकड़ में कलेक्ट्रेट का एरिया है. वर्ष 2016 में इस भवन को तोड़कर नया भव्य कलेक्ट्रेट बनाने को लेकर उच्च स्तरीय बैठक कर निर्णय लिया गया था.
इसकी जद में 1939 में बना जिला परिषद भवन व इंजीनियर्स ऑफिस भी शामिल है. कलेक्ट्रिएट भवन को तोड़ने के लिए इसमें चल रहे कई कार्यालय को हिंदी भवन, आयकर गोलंबर व प्रेमचंद गोलंबर के पास शिफ्ट किया गया है. डीएम कार्यालय को छोड़ कर कल्याण, आपदा, निर्वाचन, जनसंपर्क सहित अधिकांश कार्यालय हिंदी भवन में चलाये जा रहे हैं.
हेरिटेज का इतिहास, डच-एंग्लो संधि के तहत बना था कलेक्ट्रेट
इतिहासकार बताते हैं कि भारत में डच इस्ट
इंडिया कंपनी की स्थापना 1602 में हुई थी. डचों का पुर्तगालियों से संघर्ष हुआ और धीरे-धीरे उन्हें भारत के सारे मसाला उत्पादन पर कब्जा कर लिया. 1824 की एंग्लो-डच संधि के बाद पटना कलेक्ट्रेट का परिसर बनना शुरू हुआ जो 1857 में पूरा हुआ. अब सरकार इसे तोड़कर नया कलेक्ट्रेट भवन बनाने की तैयारी में है.

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