पटना : हाइकोर्ट का आदेश है कि थानों में कबाड़ हो रहे वाहनों का डिस्पोजल किया जाये. कोर्ट के आदेश के अनुपालन को मुख्य सचिव ने भी नौ सितंबर को बैठक की थी. इसके बाद भी राज्यभर के थानों में जब्त वाहन कबाड़ हो रहे हैं. ये जब्त वाहन खुले में पड़े हैं जो बारिश, धूप में खराब हो रहे हैं.
हर थाने में करीब 50 दोपहिया वाहन और 10 चारपहिया वाहन महीनों-सालों से खड़े हैं. हालात यह है कि अधिकांश वाहनों का ढांचा ही रह गया है, ऐसे में इनकी आसानी से नीलामी होना भी मुश्किल है. गांधी मैदान, यातायात थाना, बुद्धा कॉलोनी और थाना कदम कुंआ में जब्त वाहनों में आधे से अधिक अब किसी काम के नहीं रहे हैं.
जब्त वाहनों का रेकार्ड नहीं, कानून प्रक्रिया भी अधूरी
राज्यभर के थानों में कितने लावारिस जब्त वाहन हैं इसका रेकार्ड पुलिस मुख्यालय पर भी नहीं है. थाना पुलिस के लिये जब्त वाहन सिर्फ एक केस है. नियमानुसार लावारिस वाहन जब्त करने के बाद कोर्ट को उसकी सूचना दी जानी होती है. कोर्ट के निर्देश पर उस वाहन से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करनी होती है. पंफलेट आदि चस्पा करना होता है. छह माह बाद निस्तारण की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिये. अमूमन थाना पुलिस ऐसा नहीं कर रहीं.
एसएसपी पटना ने की नयी पहल : जब्त
वाहनों का डिस्पोजल करने के लिये एसएसपी पटना गरिमा मल्लिक ने नयी पहल की है. उन्होंने जिले के सभी थानों से किसी केस में या लावारिस रूप से जब्त वाहनाें की सूची तैयार करायी है. एसएसपी ने बताया कि 300 वाहनों का डिस्पोजल कराने के लिये डीएम को प्रस्ताव भी भेजा है.
