खाने भर की दाल का उत्पादन नहीं कर पाते हम

पटना : राज्य बीते तीन वर्षों में दलहन के उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं बन पाया है. प्रतिवर्ष जितनी दाल की हमें जरूरत होती है. उसमें अगर सभी तरह के दलहन उत्पादनों को मिला कर भी जोड़ा जाये, तो भी एक लाख क्विंटल से अधिक की कमी हमें प्रतिवर्ष रहती है. इसके लिए हमें आयात पर […]

पटना : राज्य बीते तीन वर्षों में दलहन के उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं बन पाया है. प्रतिवर्ष जितनी दाल की हमें जरूरत होती है. उसमें अगर सभी तरह के दलहन उत्पादनों को मिला कर भी जोड़ा जाये, तो भी एक लाख क्विंटल से अधिक की कमी हमें प्रतिवर्ष रहती है. इसके लिए हमें आयात पर निर्भर होना पड़ता है.

अगर, केवल बीते वर्ष (2017-18) में दलहन फसलों के उत्पादन को देखा जाये, तो इसका आंकड़ा लगभग 33 लाख तीन हजार 185 क्विंटल के उत्पादन है. जबकि औसतन खपत पांच लाख क्विंटल से अधिक है. राष्ट्रीय मानक के अनुसार प्रति व्यक्ति को 25 ग्राम प्रतिदिन दाल की जरूरत होती है. मगर, हमारे यहां आपूर्ति को 20 ग्राम प्रतिदिन से भी कम के औसत से उत्पादन होता है.
कुल मिला कर अभी भी 33 फीसदी के लगभग बाहरी आयत पर हमारी जरूरत निर्भर करती है. अगर, कृषि विभाग की ओर से जारी दलहन के वार्षिक उत्पादन के आंकड़ों को देखा जाये, तो बीते तीन वर्षों में हमारा उत्पादन बढ़ने के बदले घटा है. मसूर, मूंग, खेसारी, उड़द के उत्पादन में कमी आयी है. जबकि, चना, तुअर में मामूली वृद्धि हुई है.
अब भी 33 फीसदी आयात पर निर्भर
चना
वर्ष उत्पादन
2016-17 66502
2017-18 67177
2018-19 98857
मसूर
वर्ष उत्पादन
2016-17 146875
2017-18 147492
2018-19 142808
मूंग
वर्ष उत्पादन
2016-17 8329
2017-18 5526
2018-19 5483
खेसारी
वर्ष उत्पादन
2016-17 55176
2017-18 50314
2018-19 44335
तुअर
वर्ष उत्पादन
2016-17 33173
2017-18 28627
2018-19 35036
इस बार भी अधिक उत्पादन की संभावना नहीं
बीते दो वर्ष से जारी कृषि रोड मैप को लेकर कोई
खास असर दलहन उत्पादन पर नहीं दिखा है. रोड मैप के उद्देश्यों में बिहार को सब्जी, दलहन, तिलहन, फल, दूध, मांस, मछली में आत्मनिर्भर बनाने के साथ निर्यातक स्थिति में पहुंचना था.
लेकिन उत्पादन बढ़ाने को लेकर कृषि विभाग या अन्य सरकारी स्तरों से कोई विशेष पहल नहीं की गयी. इसके अलावा बीते वर्ष 25 जिलों के 280 प्रखंड सूखे की चपेट में आ गये. इस कारण समस्या हुई. इस बार भी 19 जिलों में कम बारिश व 13 जिलों में बाढ़ के कारण उत्पादन बढ़ने की संभावना कम ही है.

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