पटना : पटना हाइकोर्ट के तीन अधिवक्ता संघों की समन्वय समिति के अध्यक्ष योगेश चंद्र वर्मा ने दो एलपीए अपील याचिका दायर कर दो एकलपीठों के अलग-अलग पारित आदेशों की वैधता को चुनौती दी है. एक आदेश जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह का है, तो दूसरा जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह का. अपील में कहा गया है कि जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह ने एक अग्रिम जमानत की अर्जी पर सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा कि अर्जी दायर करने के बाद अगर उसमें कोई त्रुटि पायी जाती है, तो उसे पूरक शपथपत्र के जरिये ही दूर किया जा सकता है. संबंधित पक्ष को पूरक शपथपत्र दायर करना होगा.
बगैर शपथपत्र के किये गये सुधार मान्य नहीं होंगे. इसी तरह का एक आदेश जस्टिस अमानुल्लाह ने भी दिया है. इन आदेशों के आने के साथ ही वकीलों में खलबली मच गयी. दरअसल केस दायर करने के समय कभी-कभी अर्जी में त्रुटि रह जाती है. कभी याचिकाकर्ता का नाम, कभी उम्र, कभी थाना कांड संख्या जैसी त्रुटियां हो जाती हैं.
जांच के बाद त्रुटियों को चिह्नित किया जाता है : स्टांप रिपोर्टर जांच के बाद जब त्रुटियों को चिह्नित करता है, तो पेन से संबंधित वकील उन त्रुटियों को दूर कर देते हैं.
अब तक यही परिपाटी रही है. समन्वय समिति का मानना है कि त्रुटियों को दूर करने के लिए हाइकोर्ट रुल्स में पूरक शपथपत्र दायर करने का प्रावधान नहीं है. जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह के आदेश से वकीलों और मुवक्किलों की परेशानी बढ़ गयी है. इन दोनों आदेशों को रद्द करने के लिए शुक्रवार को समिति ने अपील दायर कर दी है. सोमवार को दोनों अपीलों पर सुनवाई होने की संभावना है. अपील में कहा गया है कि न्यायिक आदेश से हाइकोर्ट रुल्स को नहीं बदला जा सकता है.
