रिवर फ्रंट पर चार माह बाद भी नहीं शुरू हो सकी खाने-पीने की सुविधा
पटना : गंगा रिवर फ्रंट को पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने को लेकर समाहरणालय से राजा घाट तक प्लांटेशन, मिथिला पेंटिंग व रंग-बिरंगी लाइटों की सजावट की गयी. इसके साथ ही रिवर फ्रंट पर पहुंचने वाले पर्यटकों के खान-पान की सुविधा के लिए सात घाटों पर फूड कियोस्क खोलने का निर्णय लिया गया. ये कियोस्क निजी एजेंसी के माध्यम से मई माह में ही शुरू होने थे, लेकिन चार माह बाद भी एक भी फूड कियोस्क नहीं शुरू किये जा सके हैं.
16 गंगा घाटों से जुड़े पांच किमी लंबे रिवरफ्रंट को विकसित कर लिया गया है. इनमें से सात घाटों समाहरणालय घाट, बीएन कॉलेजिएट घाट, मिसरी घाट, बहरबा घाट, घघहा घाट, आलमगंज घाट और राजा घाट पर फूड कियोस्क बन कर तैयार है. लेकिन, अब तक कियोस्क संचालित करने वाली एजेंसियों को चयनित नहीं किया गया है. इससे मामला अब तक फाइलों में सिमटा है और पर्यटकों को लाभ नहीं मिल रहा है.
अधिकारियों की अनदेखी से लटकी योजना
गंगा रिवर फ्रंट व घाटों की रखरखाव की जिम्मेदारी निगम प्रशासन को दी गयी. इसको लेकर निगम प्रशासन ने गंगा प्रमंडल शाखा बनायी, ताकि गंगा घाटों व रिवर फ्रंट का बेहतर रखरखाव हो सके. इसके साथ ही गंगा घाटों की सभी एप्रोच सड़कों को बेहतर बनाने की योजना बनायी गयी, ताकि प्रत्येक वर्ष छठ पूजा के दौरान एप्रोच रोड को बनाने की जरूरत नहीं पड़े. लेकिन, अधिकारियों की अनदेखी की वजह से एप्रोच रोड का भी आधा-अधूरा कार्य ही किया गया है.
तेजी से पूरा किया जायेगा कार्य
पिछले दो माह से निगम में राजनीतिक उथल-पुथल थी, जिससे कई योजनाएं लंबित हो गयीं. इसमें एक रिवर फ्रंट की भी योजना शामिल है. लेकिन, अब रिवर फ्रंट के बचे कार्यों को तेजी से पूरा किया जायेगा.
सीता साहू, मेयर
