पटना : पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में शिक्षकों व कर्मचारियों की घोर कमी है. इस वजह से विवि को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय का जब मगध विश्वविद्यालय से विभाजन हुआतो इसके साथ ही 55% मैन पॉवर यानी कि कर्मचारी व शिक्षकों का भी विभाजन होना था लेकिन अब तक यह नहीं हो सका है.सिर्फ 18 कर्मचारियों का हुआ स्थानांतरण : एमयू के कर्मचारियों में से सिर्फ 18 का स्थानांतरण पीपीयू में हुआ है.
इसके अतिरिक्त जो कॉलेज बंटे हैं, वे ही शिक्षक कॉलेजों में वैसे ही स्थानांतरित हो गये हैं. लेकिन इसके अतिरिक्त पीजी विभागों के शिक्षक भी पीपीयू को मिलना था. शिक्षक कम होने की वजह से विभागों की स्थापना में मुश्किल आ रही है. सिर्फ ग्यारह ही विभाग बनाये जा सकते हैं. इसके अतिरिक्त छह अन्य विभाग खोलने पर विचार चल रहा है. लेकिन पीजी के अंतर्गत 30 से अधिक विषयों की पढ़ाई होती है जो पीपीयू में नहीं हो रही है.
पीजी विभाग नहीं होने से पीएचडी शुरू करना हो रहा मुश्किल : यूजीसी के गाइडलाइन के मुताबिक जिस विश्वविद्यालय में उक्त विषय में पीजी की पढ़ाई होती है, सिर्फ उन्हीं विषयों में पीएचडी हो सकती है. यही नहीं यह भी गाइडलाइन है कि कम से कम एक बैच सफलता पूर्वक उतीर्ण होना चाहिए. लेकिन यहां सिर्फ 11 विभाग हैं. छह अन्य विषयों में पीजी की पढ़ाई शुरू करने और उसमें पीएचडी कराने की घोषणा भी कर दी गयी है. लेकिन वर्तमान में एक छात्र भी पीजी उतीर्ण नहीं है. जाहिर है कि इस वजह से यहां के छात्रों के लिए पीएचडी शुरू करना काफी मुश्किल है.
एमयू से 55% शिक्षकों का होना है स्थानांतरण
एमयू से 55 प्रतिशत शिक्षक पीपीयू को मिलने हैं लेकिन अब तक नहीं मिले हैं. शिक्षकों की काफी कमी है. इस वजह से पीजी विभागों के स्थापना व संचालन में दिक्कतें आ रही हैं.
प्रो मनोज कुमार, प्रॉक्टर, पीपीयू
