पटना : राज्य की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में शामिल पश्चिमी कोसी नहर के लिए भूमि अधिग्रहण का काम बाढ़ के बाद पूरा होने की संभावना है. इस परियोजना के लिए 9232.69 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना था.
इसमें से 8615.33 एकड़ का भूमि अधिग्रहण हो चुका है और 617.55 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना बाकी है. इस परियोजना से दरभंगा और मधुबनी जिलों में कुल दो लाख 34 हजार 800 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी. इसमें से अब तक दो लाख एक हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई क्षमता विकसित हो सकी है.
वहीं, विभिन्न नहरों के अलग-अलग भाग में गैप रहने के कारण वास्तविक रूप से केवल 58 हजार 55 हेक्टेयर क्षेत्र में ही मधुबनी और दरभंगा जिले के किसानों को सिंचाई की सुविधा दी जा रही है. जल संसाधन विभाग के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का काम फिलहाल बाढ़ के कारण रुका हुआ है.
बाढ़ खत्म होते ही इस काम में तेजी आयेगी. इससे पहले इस साल 13 जून को झंझारपुर में इस परियोजना की समीक्षा की गयी थी. उसमें क्षेत्रीय पदाधिकारियों और संबंधित जिलाधिकारी को पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के बाकी कार्यों को पूरा करने के लिए भूमि अधिग्रहण में तेजी लाने का निर्देश दिया गया था.
परियोजना का निर्माण 1972 में हुआ था शुरू
पश्चिमी कोसी नहर परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 1972 में शुरू हुआ था. जमीन अधिग्रहण का पेंच फंसने से यह परियोजना दशकों से पूरी तरह से लंबित पड़ी रही.
नीतीश कुमार की सरकार ने नवंबर 2013 में अधूरी परियोजना को पूरा करने के लिए एक अरब 79 करोड़ 20 लाख रुपये की राज्य योजना के तहत स्वीकृति दी. इसके बाद इसमें तेजी आयी. हाल ही में दो जुलाई को इस परियोजना के भूमि अधिग्रहण की समीक्षा मधुबनी के जिलाधिकारी ने भी की.
क्षतिग्रस्त हुए 52 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र
पटना. समाज कल्याण विभाग ने बाढ़ग्रस्त इलाकों में क्षतिग्रस्त हुए 52 आंगनबाड़ी केंद्रों की सूची आपदा विभाग को भेज दी है. ताकि हर आंगनबाड़ी केंद्रों को दो-दो लाख का अनुदान राशि मिल सके. समाज कल्याण विभाग सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच कराकर रिपोर्ट बना रहा है.
अधिकारियों के मुताबिक यह सूची अभी बढ़ सकती है. बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में जहां आंगनबाड़ी केंद्र क्षतिग्रस्त हो गये हैं या जहां बाढ़ के कारण परेशानी हो रही है, वैसे सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को एक-दूसरे में मर्ज किया गया है. ताकि बच्चों को परेशानी नहीं हो और आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलने वाली सुविधाएं बच्चे व महिलाओं को लगातार मिले.
