अनुज शर्मा
पटना : ‘ वॉयस सैंपल ‘. इन दिनों यह शब्द भले ही अनंत सिंह की आवाज की जांच के बाद लोगों की जुबान पर चढ़ा है, पर सच यह है कि पुलिस राज्य में हुए बड़े- बड़े अपराधों का खुलासा इसकी मदद से कर चुकी है. बिहार विधि विज्ञान प्रयोगशाला के ध्वनि विश्लेषण का लोहा पूरे देश की पुलिस मानती है. इसकी जांच रिपोर्ट के आधार पर इंटरनेशनल अपराधियों से लेकर भ्रष्ट नौकरशाह तक जेल की हवा खा रहे हैं.
आठ साल पहले एफएसएल की जांच से ही खुलासा हुआ था कि नालंदा के चंडी थाना क्षेत्र निवासी विजय साव ने पैसे के लालच में अपने बेटे का खुद अपहरण कराया था. विजय के बेटे के लापता होने पर सरकार तक को हाइकोर्ट में जवाब देना पड़ा था. साव ने बोरिंग कैनाल रोड स्थित एक कोचिंग सेंटर में बेटे की इंजीनियिरिंग की तैयारी के लिए एडमिशन कराया था. एक्जाम में फेल होने पर साव ने कोचिंग संचालक से फीस लौटाने को कहा, फीस न मिलने पर उसने एक अगस्त 2011 को बेटे के अपहरण का केस थाना चंडी में दर्ज करा दिया. साव के बेटे की बरामदगी के लिए हाइकोर्ट ने बिहार पुलिस तक को तलब किया. बाद में एक रिकार्डिंग के आधार पर साव उसकी पत्नी और चार बच्चों की आवाज की जांच की गयी तो मामला खुल गया. साव ने ही बेटे को गायब कर दिया था. भोजपुर के नवादा थाना क्षेत्र में जून 2012 में कोचिंग संचालक की हत्या के आरोपित का मामला भी आवाज की जांच के बाद खुलासा हुआ.
पर्चा लीक मामले में भी आवाज टेस्ट की रही भूमिका : बिहार के चर्चित एसएससी पर्चा लीक मामले में आयोग के अध्यक्ष सुधीर कुमार को वॉयस टेस्ट के आधार पर ही जेल भेजा गया था. कुछ समय पहले एनआइए ने इंटरनेशनल जाली करेंसी के मामले में मालदा से चार संदिग्धों को पकड़ा था. उनके आडियो टेप की एफएसएल ने ही जांच की थी इसके आधार पर एनआइए सजा दिलाने में सफल रही थी.
एफएसएल पटना में ध्वनि विश्लेषण, फारेंसिक हिस्ट्रोपैथालाजी सहित कई जांच की सुविधा है. लैब तकनीक रूप से समृद्ध है. एफएसएल की जांच में निकले निष्कर्ष से पुलिस अपराधियों को सजा दिलाने में सफल हो रही है.
दास अशोक कुमार, निदेशक, विधि विज्ञान प्रयोगशाला
