एनएमसी बिल को लेकर आक्रोश. पीएमसीएच में डॉक्टरों ने ओपीडी को कराया बंद, मरीज होते रहे परेशान
पटना : एनएमसी बिल के खिलाफ डॉक्टरों में काफी आक्रोश है. आइजीआइएमएस में हड़ताल ठप हुए 24 घंटे भी नहीं हुए कि पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर शनिवार को हड़ताल पर चले गये. ऐसे में इलाज व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी.
हड़ताली डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाएं ठप कर दीं. देखते ही देखते ओपीडी में सन्नाटा पसर गया. हड़ताल के दौरान समय पर इलाज नहीं मिलने की वजह से 1300 से अधिक मरीज बिना इलाज के लौट गये. पांच ऑपरेशन टाल दिये गये, मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ गया. पीएमसीएच में इमरजेंसी छोड़ स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गयीं.
10:30 बजे के बाद ओपीडी ठप :
जूनियर डॉक्टर व मेडिकल छात्रों ने परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और रैली निकाली. हंगामा कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने जब सुना कि ओपीडी में मरीजों का इलाज चल रहा है, तो वे उग्र हो गये. दर्जनों की संख्या में जूनियर डॉक्टर ओपीडी में पहुंच गये.
नाराज डॉक्टरों ने गार्ड को धक्का देकर गेट बंद कर दिया. इतना ही नहीं डॉक्टरों ने रजिस्ट्रेशन काउंटर के कर्मियों को फटकार लगा कर सभी काउंटरों को बंद करा दिया. 10:30 बजे के बाद ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गयीं. करीब दो घंटे चले ओपीडी में 1280 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जिनका मुश्किल से इलाज किया गया.
एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड व पैथोलॉजी लैब बंद : दो घंटे के लिए जो डॉक्टर ओपीडी में बैठे, उन्होंने अधिकांश मरीजों को एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआइ और पैथोलॉजी जांच लिखा. लेकिन जब मरीज एक्स-रे कराने पहुंचे, तो वहां डॉक्टर मौजूद नहीं थे. मरीजों की मानें, तो सुबह के 11 बजे तक एक्स-रे हुआ, लेकिनबाद में डॉक्टरों के कहने पर टेक्नीशियनों ने जांच बंद कर दी. इतना ही नहीं वार्ड में भर्ती मरीज भी दर्द से कराह उठे, क्योंकि अधिकांश वार्डों में सीनियर डॉक्टर राउंड लगाने नहीं आये. ऐसे में वार्डों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
क्या कहते हैं प्रिंसिपल
सुबह हड़ताल का असर नहीं था. ओपीडी में इलाज व ओटी में ऑपरेशन किये गये. लेकिन बाद में हड़ताली डॉक्टरों ने ओपीडी को प्रभावित किया. हालांकि मैं खुद ओटी में पहुंच गया और अपनी मौजूदगी में ऑपरेशन करवाया. यही वजह है कि ऑपरेशन की संख्या अधिक है. डॉक्टरों से हड़ताल तोड़ने की लगातार अपील कर रहा हूं, ताकि मरीजों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हो.
-डॉ विद्यापति चौधरी, प्रिंसिपल, पीएमसीएच
क्या कहते हैं जेडीए अध्यक्ष
एनएमसी बिल के विरोध
में यह हड़ताल की जा रही है. वहीं जब तक दिल्ली में हड़ताल रहेगी, तब तक हम लोग भी पीएमसीएच में जारी रखेंगे. हम लोगों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का पुतला दहन भी परिसर में किया. आज भी पीएमसीएच में हड़ताल रहेगी और ओपीडी, वार्ड, रेडियोलॉजी व पैथोलॉजी जांच आदि जगहों पर जूनियर डॉक्टर कार्य नहीं करेंगे.
डॉ शंकर भारती, अध्यक्ष, जेडीए, पीएमसीएच
पांच ऑपरेशन टले
दो घंटे के लिए ओपीडी व ओटी खुले होने से जहां 40 प्रतिशत मरीजों का इलाज हुआ, वहीं दूसरी ओर करीब 15 माइनर व 17 मेजर ऑपरेशन किये गये. ओटी नंबर पांच में 1, चार में 1, ओटी नंबर 1 में 5 मेजर व 5 माइनर इस तरह से 32 से अधिक ऑपरेशन किये गये. इसके अलावा स्त्री एवं प्रसूति वार्ड के लेबर रूम में भी ऑपरेशन हुए. लेकिन बाद में हड़ताली ओटी नंबर चार व पांच में पहुंच गये. ऐसे में करीब पांच ऑपरेशन टाल दिये गये.
एनएमसी पर डॉक्टरों की अलग-अलग राय
किसी ने कहा फायदेमंद, किसी ने कहा नुकसानदायक
एनएमसी के लागू होने के बाद भले ही डॉक्टरों की कमी दूर हो जायेगी, लेकिन निजी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस व पीजी की सीटें बेचने का कारोबार किया जायेगा. क्योंकि इसमें 50 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन की कोई पाबंदी नहीं है.
डॉ आशुतोष कुमार सिंह, अध्यक्ष
बिहार डेंटल सर्विसेज एसोसिएशन
एनएमसी बिल सरकार, समाज और चिकित्सक तीनों के हित में बनाया गया है. इस बिल से इंस्पेक्टर राज खत्म होगा. आयुर्वेद व होमियोपैथी के छात्र भी पांच साल की पढ़ाई करते हैं. आयुर्वेद के छात्र एग्जिट टेस्ट देने को तैयार हैं.
डॉ दिनेश्वर प्रसाद, प्रिंसिपल, राजकीय
आयुर्वेदिक कॉलेज
एनएमसी बिल काफी बेहतर है. वर्तमान में एमसीआइ में माफिया राज चल रहा था. प्राइवेट को अधिक बढ़ावा मिल रहा था. हालांकि एनएमसी में ब्रिज कोर्स व एग्जिट टेस्ट पर सरकार को विचार करना चाहिए.
डॉ राजीव कुमार सिंह, एचओडी, फिजियोलॉजी, पीएमसीएच
बिहार में 17,685 लोगों पर एक एलोपैथ डॉक्टर
पटना सहित पूरे बिहार में डॉक्टरों की भारी कमी है. वर्तमान में कई पदों पर बहाली हुई है. स्वास्थ्य विभाग व विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में 17,685 आबादी पर एक एलोपैथिक डॉक्टर है, जबकि डब्ल्यूएचओ के अनुसार एक हजार आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए. वहीं, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ हेल्थ इंटेलिजेंस 2018 में प्रकाशित नेशनल हेल्थ प्रोफाइल के अनुसार साल 2017 तक बिहार में करीब 41 हजार डॉक्टर पंजीकृत हैं.
