‘बजट सब्सिडीज आॅफ द सेंट्रल गवर्नमेंट एंड 14 मेजर स्टेट’ व्याख्यान पर कार्यक्रम का आयोजन
पटना : केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी की उपयोगिता में सुधार लाने की जरूरत है. सरकारों के खर्च का बेहतर मैनेजमेंट और उसमें सुधार करने से बिना कोई नया टैक्स लगाये ही अतिरिक्त राजकोषीय व्यवस्था हो सकती है. यह जीडीपी का करीब 12 फीसदी तक हो सकती है. जीडीपी के इस 12 फीसदी हिस्से को अतिरिक्त वित्तीय स्थान देते हुए उनका अलग से उपयोग शिक्षा, चिकित्सा, आधारभूत संरचनाओं जैसे विकास कार्यों के लिए किया जा सकता है.
यह बातें नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च के विशिष्ट फेलो और 14वें वित्त आयोग के सदस्य प्रोफेसर सुदीप्तो मंडल ने कहीं. वे शनिवार को आयोजित ‘बजट सब्सिडीज आॅफ द सेंट्रल गवर्मेंट एंड 14 मेजर स्टेट’ व्याख्यान में बोल रहे थे. इसका आयोजन इंटरनेशनल ग्रोथ सेंटर (आइजीसी) ने होटल मौर्या में किया था.
यह देखना आवश्यक है कि सब्सिडी का कितना उपयोग हो रहा है : सुदीप्तो मंडल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार विकास के लिए सब्सिडी देती हैं. इनका परिणाम प्रति व्यक्ति के आधार पर देखना चाहिए. यह देखना आवश्यक है कि सब्सिडी का कितना उपयोग हो रहा है और उससे शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात सुविधाओं में कितना विकास हो रहा है.
साथ ही आमलोगों को उसका कितना लाभ मिल रहा है. उन्होंने शिक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें क्वांटिटी की जगह क्वालिटी सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है. इस दौरान आद्री के सदस्य सचिव और आइजीसी बिहार के प्रमुख डॉ शैबाल गुप्ता ने राज्य और केंद्र सरकार के स्तर पर सब्सिडी के विषय पर विचार-विमर्श पर जोर दिया. आद्री के निदेशक प्रोफेसर प्रभात पी घोष ने धन्यवाद ज्ञापन किया.
