पटना : निर्भीक हो करें तैयारी, मेरिट ही नियुक्ति का आधार

उत्तरपुस्तिकाओं की कोडिंग से लेकर मूल्यांकन व इंटरव्यू तक फुलप्रूफ व्यवस्था शिशिर सिन्हा पटना : बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा ली जाने वाली प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को निर्भीक होकर समग्रतापूर्वक अध्ययन और तैयारी करनी चाहिए. आयोग के वर्तमान फुलप्रूफ सिस्टम में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है. सिर्फ […]

उत्तरपुस्तिकाओं की कोडिंग से लेकर मूल्यांकन व इंटरव्यू तक फुलप्रूफ व्यवस्था
शिशिर सिन्हा
पटना : बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा ली जाने वाली प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को निर्भीक होकर समग्रतापूर्वक अध्ययन और तैयारी करनी चाहिए.
आयोग के वर्तमान फुलप्रूफ सिस्टम में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है. सिर्फ मेधा नियुक्ति का आधार बनेगी. बीपीएससी के अध्यक्ष शिशिर सिन्हा ने प्रभात खबर से खास बातचीत में बताया कि सभी उत्तर पुस्तिकाओं की अब डबल कोडिंग की जाती है. साथ ही पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया सीसीटीवी की निगरानी में पूरी की जा रही है.
एक वर्ष में 80 रिजल्ट : बीपीएससी का पूरा जोर परीक्षाओं को समय पर संचालित करने पर है. अध्यक्ष ने बताया कि इसके लिए चालू वर्ष के वर्क कैलेंडर का अनुकरण करने के साथ-साथ पहले की लंबित पड़ी परीक्षाओं के भी विभिन्न चरणों को जल्द-से- जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है.
बीपीएसएसी इसके लिए पांच-सात परीक्षाओं पर एक साथ काम कर रहा है. शीघ्र मूल्यांकन के लिए परीक्षकों की संख्या बढ़ायी गयी है और आयोग के सभाकक्ष तक को मूल्यांकन कक्ष में बदल दिया गया है. ऐसे प्रयासों का ही नतीजा है कि पिछले एक वर्ष में आयोग ने 80 रिजल्ट दिये हैं.
उत्तरपुस्तिका पर ऐसे चिह्न न बनाएं, जिससे पहचान हो सके
उत्तर पुस्तिकाओं पर दिये गये निर्देशों का अभ्यर्थी पूरी तरह अनुपालन करें और उन पर ऐसे चिह्न नहीं बनाएं, जिससे उनकी पहचान हो सके, अन्यथा ऐसी उत्तरपुस्तिका को रद्द किया जा सकता है. अवरण पृष्ठ पर किसी तरह का नाम, हस्ताक्षर या चिह्न कदापि नहीं होना चाहिए.
सॉफ्टवेयर बेस्ड कोडिंग से इंटरव्यू बोर्ड का चयन
उन्होंने कहा कि इंटरव्यू की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है. अब बोर्ड का चयन सॉफ्टवेयर बेस्ड कोडिंग से होता है. इसमें इंटरव्यू शुरू होने से कुछ देर पहले तक बोर्ड के सदस्यों को भी नहीं मालूम होता है कि उन्हें कौन-सा बोर्ड दिया जायेगा.
इंटरव्यू के दौरान बोर्ड के सामने अभ्यर्थी का नाम, क्रमांक, विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थान का नाम, जहां से उसने पढ़ाई की है, नहीं होता है. इंटरव्यू बोर्ड का गठन भी विशिष्ट जनों के बीच से ही किया जा रहा है, जिनमें भारत सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी, डीजी स्तर के पुलिस अधिकारी, राजदूत के पद पर कार्य कर चुके राजनायिक और बड़े-बड़े विवि के प्रोफेसर शामिल हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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