छोटे और मध्यम वर्ग के व्यवसायियों को मिल सकेगी बड़ी सुविधा
पटना : जीएसटी के आरंभ में प्रतिमाह 3 तरह के फॉर्म की परिकल्पना की गयी थी, जिन्हें लागू नहीं किया जा सका और जीएसटीआर-3बी के रूप में एक अंतरिम व्यवस्था की गयी, जो आज तक लागू है. वरीय चार्टर्ड अकाउंटेंट राजेश कुमार खेतान का कहना है कि सरकार को जीएसटीआर-3बी रिवाइज करने का अवसर देना चाहिए था. इससे सरकार की मैचिंग की परिकल्पना भी प्रभावित नहीं होती और आरंभिक गलतियों को आसानी से सुधारा भी जा सकता था और छोटे व मध्यम वर्ग के व्यवसायियों के लिए बड़ी सुविधा हो जाती. इसके अलावा अभी सबसे ज्वलंत समस्या वर्ष 2017-18 का वार्षिक रिटर्न है, जो 19 टेबल में बांटा गया है.
इनमें से टेबल आठ में जीएसटीआर-2ए से इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान पूर्णतया निरर्थक है और इसका कोई कानूनी आधार भी नहीं है. एचएसएन कोड की डिटेल परेशानी की मुख्य वजह है. टेबल 17 में तो यह स्वतः आ जानी चाहिए थी, क्योंकि व्यवसायी द्वारा जीएसटीआर-1 में यह मासिक या त्रैमासिक विवरणी भरते समय दी जा चुकी है. टेबल 18 में क्रय की गयी वस्तु पर एचएसएन कोड देने की स्थिति में कोई भी नहीं है, क्योंकि यह डिटेल उन्होंने बना कर नहीं रखी है. अतः टेबल 8 और 18 को हटाया जाना अति आवश्यक है. इसके अलावा टेबल 6 में इनपुट टैक्स क्रेडिट को इनपुट, कैपिटल गुड्स, सर्विस में बांटना भी झंझट भरा है. अगर शुरू से ही यह पता होता, तो बुक्स इसके आधार पर रखी जा सकती थी.
धारा 16 में सुधार जरूरी
खेतान ने कहा कि जहां तक मासिक रिटर्न का सवाल है, तो सबसे पहले जीएसटीआर-1 के आधार पर 3बी में फिगर स्वतः आ जाना चाहिए और निल रेटेट एक्जमपटेंट इन वार्ड सप्लाइ की डिटेल का कॉलम हटाया जाना चाहिए. लेकिन यह समस्या तो अब कुछ समय की है क्योंकि रिटर्न के नये प्रारूप सरकार द्वारा जारी कर दिये गये हैं, जो जनवरी से प्रायोगिक तौर पर लागू होने की संभावना है. सभी समस्याएं धारा 16 की वजह से हैं. यानी इसमें सुधार होना ज्यादा जरूरी है.
