पटना : राज्य में गेहूं खरीद का सरकारी लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया. इस साल दो लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य था, लेकिन खरीद हुई मात्र 3064 मीटिरक टन. पैक्स और व्यापार मंडलों को 30 जून तक गेहूं खरीदना था.
पिछले साल 17504 टन गेहूं की खरीद हुई थी. सरकार का तर्क है कि सरकारी खरीद दर और बाजार का मूल्य लगभग बराबर हो जाने के कारणण किसान सरकारी खरीद केंद्र पर नहीं पहुंचे. सरकार का मकसद भी यही है कि किसानों को लाभकारी मूल्य मिले. सरकार ने 1840 रुपये प्रति क्विंटल दाम तय कर रखा था. अब तक वैशाली, सारण, शेखपुरा, कटिहार, मधुबनी, औरंगाबाद और जमुई में गेहूं की खरीद की प्रक्रिया आरंभ नहीं हो पायी है. पहली बार पैक्स के माध्यम से भी गेहूं की खरीद की व्यवस्था हुई.
पहले व्यापार मंडल गेहूं की खरीद करता था.1500 से अधिक समितियों का चयन गेहूं खरीद के लिए हुआ था. डिफाॅल्टर और जनवितरण का काम करने वाले पैक्स को गेहूं खरीद से अलग रखा गया था. लक्ष्य के अनुरूप खरीद नहीं होने का एक बड़ा कारण समय पर खरीद शुरू नहीं होना रहा. चुनाव के कारण खरीद काफी देरी से शुरू हुई. एक अप्रैल से खरीद शुरू होना था, लेकिन सही में खरीद 15 मई के आसपास ही शुरू हुई. सहकारिता मंत्री राणा रणधीर सिंह ने बताया कि उन्होंने गेहूं खरीद की समीक्षा की है. अधिकारियों से इसमें तेजी लाने को कहा गया है.
