पटना : बालश्रमिकों की गवाही की रफ्तार धीमी, आरोपितों पर नहीं हो पा रही कार्रवाई

अनुज शर्मा बीते छह माह में मात्र 40 बच्चों की ही गवाही हो पायी है पटना : शेरघाटी ब्लाॅक के एक गांव के निवासी एस कुमार मांझी को पांच मार्च, 2016 को जयपुर से मुक्त कराया गया था. नाबालिग मांझी से चूड़ी के कारखाने में बालश्रमिक के रूप में काम लिया जा रहा था. राजस्थान […]

अनुज शर्मा
बीते छह माह में मात्र 40 बच्चों की ही गवाही हो पायी है
पटना : शेरघाटी ब्लाॅक के एक गांव के निवासी एस कुमार मांझी को पांच मार्च, 2016 को जयपुर से मुक्त कराया गया था. नाबालिग मांझी से चूड़ी के कारखाने में बालश्रमिक के रूप में काम लिया जा रहा था. राजस्थान पुलिस ने केस दर्ज किया.
मामला जयपुर के सेशन कोर्ट में विचाराधीन है. बीते दिनों इस मामले में मांझी की गवाही थी, लेकिन तारीख से पहले मांझी लापता हो गया. बालश्रमिक उपलब्ध कराने वाले गिराेह से जुड़े तौफीक नाम के व्यक्ति ने उसे कहीं छिपा दिया था. कोर्ट की तारीख बीत जाने के बाद उसे आजाद कर दिया गया. बिहार में मांझी की तरह और बच्चे हैं, जो मानव तस्करी का शिकार तो हुए है, पर सुरक्षा का अभाव और सरकारी तंत्र की उदासीनता के कारण न्याय की लड़ाई नहीं लड़ पा रहे हैं. जयपुर से मुक्त कराये गये 39 बच्चों में से पांच की अगले हफ्ते गवाही है, लेकिन सुरक्षा अभी नहीं मिली है. सरकार के साथ मिलकर बालश्रम के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार बताते हैं कि राजस्थान में पांच हजार से अधिक बालश्रमिक फंसे हुए हैं. मानव तस्करों का नेटवर्क गांव-गांव तक है. तीन हजार रुपये एकमुश्त और हजार रुपये प्रतिमाह प्रति बच्चा के कमीशन पर बालश्रमिक उपलब्ध करा रहे हैं.
एक दो माह तो बच्चे के परिवार को कुछ पैसा देते हैं, ताकि वह पुलिस के पास न जाये. मुक्त कराये गये बच्चों की कोर्ट में पैरवी में सरकारी तंत्र की रुचि नहीं है, बीते छह माह में मात्र 40 बच्चों की ही गवाही हो पायी है. धनरुआ के एक बच्चे की जानकारी के आधार पर आइजी कमजाेर वर्ग ने पुलिस को कठोर कार्रवाई के आदेश दिये थे लेकिन कार्रवाई हुई नहीं. उसके साथ गये नौ बच्चों का अभी तक सुराग नहीं मिला है.

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