पटना : पार्षद जता रहे हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका

मेयर सीता साहू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का मामला पटना : मेयर सीता साहू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाये जाने के बाद निगम पार्षद दो खेमे में बंट गया है. इनमें एक खेमा मेयर का जबकि दूसरा पूर्व डिप्टी मेयर विनय पप्पू का है. दोनों खेमा नाराज पार्षदों को अपनी तरफ मिलाने में जुटा है. […]

मेयर सीता साहू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का मामला
पटना : मेयर सीता साहू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाये जाने के बाद निगम पार्षद दो खेमे में बंट गया है. इनमें एक खेमा मेयर का जबकि दूसरा पूर्व डिप्टी मेयर विनय पप्पू का है. दोनों खेमा नाराज पार्षदों को अपनी तरफ मिलाने में जुटा है.
सोमवार को पूर्व डिप्टी मेयर विनय कुमार पप्पू की अध्यक्षता में रजनी देवी के प्रतिनिधि व मेयर से नाराज पार्षदों की बैठक हुई. दर्जनों पार्षदों के घर पहुंच कर समर्थन भी मांगा. वहीं मेयर गुट के पार्षदों का कहना है कि पूर्व डिप्टी मेयर की ओर झूठा मैसेज पार्षदों के मोबाइल पर भेजा जा रहा है. इसके साथ ही हॉर्स ट्रेडिंग की भी आशंका जाहिर की है.
पूर्व डिप्टी मेयर ने जतायी सदस्यता जाने की आशंका
पूर्व डिप्टी मेयर विनय कुमार पप्पू ने बताया कि मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर 26 पार्षदों का हस्ताक्षर है. हस्ताक्षर किये पार्षदों को विशेष बैठक में उपस्थित होना होगा, अन्यथा उनकी सदस्यता पर खतरा है.
पूर्व डिप्टी मेयर ने पटना जिला परिषद के हवाला देते हुए कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले सदस्यों को हाइकोर्ट का नोटिस गया है. वहीं, मेयर गुट के पार्षद इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी व आशीष कुमार सिन्हा ने कहा कि पूर्व डिप्टी मेयर विशेष बैठक से पहले हताश व निराश हो गये हैं. उन्हें पार्षदों का समर्थन नहीं मिल रहा है, तो भ्रम फैलाना शुरू कर दिया है. बिहार नगरपालिका एक्ट 2007 और अविश्वास प्रस्ताव नियमावली 2010 में कहीं जिक्र नहीं है.
पार्षदों से संपर्क में है हर गुट
मेयर व पूर्व डिप्टी मेयर गुट दोनों एक-दूसरे पर हॉर्स ट्रेडिंग का भी आरोप-प्रत्यारोप लगाना शुरू कर दिया है. एक पार्षद ने बताया कि सिंगापुर व बैंकॉक भ्रमण कराने का भी ऑफर मिल रहा है.
हालांकि, मेयर सीता साहू के प्रतिनिधि व पुत्र शिशिर कुमार और पार्षद इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी, आशीष कुमार सिन्हा, कैलाश कुमार, मुन्ना जायसवाल, छठिया देवी के प्रतिनिधि पूरे दिन मीटिंग व पार्षदों से मिलते रहे. मेयर गुट के पार्षदों का दावा है कि 55 से अधिक पार्षद समर्थन कर रहे है. पूर्व डिप्टी मेयर व रजनी देवी गुट लगातार पार्षद से संपर्क कर रहे है, लेकिन कोई पार्षद समर्थन देने को तैयार नहीं है.
शहर सरोकार
बीच शहर का यह वार्ड, मत पूछिए पानी, पाइप व खुले नाले का हाल
नगर निगम का वार्ड संख्या-23. इस वार्ड में अधिकतर मुहल्ले पुराने हैं, जहां ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी हैं. वार्ड के बसंत विहार कॉलोनी, कस्तूरबा पथ, यमुना अपार्टमेंट, दादी जी लेन, खेतान गली सहित कई मुहल्ले हैं. इन पुराने मुहल्लों में 50 साल पुराने जलापूर्ति पाइप बिछाये गये हैं, जो अब जर्जर हो चुके हैं. स्थिति यह है कि इन मुहल्लों के घरों में सप्लाइ कापानी पहुंचता ही नहीं है. जहां सप्लाइ का पानी पहुंच रहा है, वहां गंदा पहुंच रहा है. आलम यह है कि इन मुहल्लों में रहने वाले लोगों के लिए निजी बोरिंग ही पीने के पानी का सहारा है. प्रभात खबर संवाददाता प्रभात रंजन व फोटोग्राफर सरोज ने वार्ड की हकीकत देखी. पेश है रिपोर्ट.
वार्ड के संपन्न लोगों ने निजी बोरिंग लगायी है़ ताकि, पीने के पानी की दिक्कत नहीं हो. लेकिन, वार्ड में रहने वाले गरीब परिवारों को
पेयजल के संकट से जूझना पड़ रहा है. वार्ड में एक भी पंप हाउस नहीं है. लोगों को पीने के पानी की दिक्कत नहीं हो, इसको लेकर आठ जगहों पर चापाकल लगाये गये, ताकि चापाकल से पीने का पानी ले सकें. लेकिन, सभी चापाकल खराब पड़े हैं. वहीं, पांच जगहों पर सबमर्सिबल बोरिंग भी लगायी गयी हैं, जो पर्याप्त नहीं हैं.
अतिक्रमण की वजह से पैदल
चलना मुश्किल : वार्ड की मुख्य सड़कों में एक है बोरिंग कैनाल रोड. इस रोड पर बोरिंग रोड चौराहा
से लेकर राजापुर पुल तक जगह-जगह सड़क पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है. निगम प्रशासन ने वर्षों पहले राजापुर पुल के समीप सब्जी मंडी बनायी, जहां दुकानदारों को जगह आवंटित की गयी. लेकिन, वर्तमान में आवंटित दुकानदार सड़क तक दुकान सजाये बैठे रहते हैं. इससे रोजाना लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है. शाम में पैदल भी चलना मुश्किल है.
आप तीसरी बार पार्षद बनी हैं. लेकिन, पीने के पानी की समस्या खत्म नहीं कर सकीं?
-वार्ड में पीने के पानी की समस्या वर्षों से है. इस समस्या को लेकर लगातार बोर्ड की बैठक में सवाल उठाती रही. लेकिन, समस्या जस-की-तस है. अभी हर घर नल का जल योजना के तहत योजनाओं की अनुशंसा की है, जिस पर काम चल रहा है. मेरे वार्ड में एक भी पंप हाउस नहीं है. इसको लेकर लगातार प्रयास कर रही हूं. लेकिन, पंप हाउस नहीं बनाया जा रहा है.
जगह होने के बावजूद वार्डमें सामुदायिक
भवन क्यों नहीं बनवा पायीं?
-हां, मैंने ही निगम प्रशासन को द्वारिका मंदिर लेन में भूखंड की जानकारी दी थी. जिस भूखंड पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है, वहां पर सामुदायिक भवन व रैन बसेरा बनाने का सुझाव दिया. एक बार कार्यपालक अभियंता स्थल निरीक्षण करने पहुंचे. इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गयी है.
शत प्रतिशत इलाके में लाइटें भी नहीं लगायी गयी हैं?
-वर्षों से 25-50 लाइटें प्रत्येक साल मिलती थीं. लेकिन, पहली बार आवश्यकता के अनुरूप लाइटें मिली हैं. इससे 500 के करीब लाइटें लगायी गयी हैं. लेकिन, पोल नहीं होने की वजह से कुछ इलाकों में समस्याएं हैं. इसका समाधान शीघ्र होगा.
अतिक्रमण को खत्म क्यों नहीं किया जा सका है?
-राजापुर पुल के समीप सब्जी मंडी है. इस सब्जी मंडी के दुकानदार ठेला-खोमचा सड़क पर सजा देते हैं और सामान बेचते हैं. इसको लेकर निगम की टीम समय-समय पर अभियान चला कर अतिक्रमण हटाती है. लेकिन, दुबारा अतिक्रमणकारी पहुंच जाते हैं. स्थायी निदान को लेकर प्रयास किया जा रहा है और शीघ्र समस्या से निदान मिलेगा.वार्ड में बड़ा खुला नाला है, इसे क्यों नहीं ढका जा रहा है.
-चरणबद्ध तरीके से नाला ढका जा रहा है. लेकिन, गांधी नगर से राजापुर पुल तक नाला खुला है. इसे ढक कर सड़क बनाने को लेकर वर्षों पहले अनुशंसा की गयी है. अनुशंसा पर योजनाएं भी बनायी गयीं, जो अब तक फाइलों में दबी हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >