पटना : जीएसटी के लागू हुए दो वर्ष हो गये. बिहार में अब इसमें सुधार दिखने लगा है. चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में इसके अंतर्गत टैक्स संग्रह में 20-25 प्रतिशत का ग्रोथ रहने की संभावना है. बीते वित्तीय वर्ष 2018-19 में 10 हजार 676 करोड़ टैक्स जमा हुए थे. इसमें करीब 25 फीसदी का इजाफा होने का अनुमान रखा जा रहा है.
चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में जीएसटी के तहत संग्रह में ग्रोथ रेट 26 फीसदी दर्ज की गयी है. इसके बरकरार रहने की उम्मीद है. हालांकि, बीते वित्तीय वर्ष में जीएसटी के तहत टैक्स ग्रोथ रेट 44.76 प्रतिशत रहा था.
परंतु इतना बड़ा ग्रोथ रेट इस बार रहने की संभावना बहुत कम है. इसका प्रमुख कारण बताते हुए जीएसटी आयुक्त रणजीत कुमार कहते हैं कि पहले साल बड़ी संख्या में छूटे हुए व्यापारियों को इससे जोड़ा गया है. इस वजह से बड़ा ग्रोथ रेट दर्ज किया गया था, लेकिन इसके बाद के वर्षों में अब नये व्यापारियों के निबंधन की रफ्तार थोड़ी स्थिर हो गयी है. साथ ही टैक्स संग्रह की दर भी निर्धारित हो गयी है. फिर भी यहां टैक्स संग्रह की रफ्तार पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में रही है.
टैक्स चोरी रोकने पर खासतौर से दिया जा रहा है ध्यान
आयुक्त ने यह भी कहा कि बिहार जैसे राज्य में जीएसटी इस तरह की ग्रोथ रेट अच्छा कहा जायेगा. उन्होंने कहा कि यहां टैक्स संग्रह की अभी और संभावना है, जिस पर इस वित्तीय वर्ष में खासतौर से ध्यान दिया जा रहा है. कुछ लोग टैक्स चोरी करने के अलग-अलग तरीके अपनाते रहते हैं. इसे रोकने पर खासतौर से ध्यान दिया जा रहा है.
अब तक टैक्स नहीं देने वालों को नोटिस जारी करके एक हजार 46 करोड़ की वसूली की जा चुकी है. यहां कुछ अहम चुनौतियां हैं, जिन्हें दूर करने पर फोकस किया जा रहा है. कुछ लोग टैक्स चोरी के लिए नकली इनव्हाइस का सहारा लेते हैं या फर्जी कंपनी बनाते हैं. ऐसे कंपनियों की पहचान कर उन पर कार्रवाई की जायेगी. इसके अलावा बड़ी संख्या में छोटे व्यापारी भी हैं, जो बिना खाता-बही या टैक्स दिये सामान बेचते हैं.
ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है. इन पर खासतौर से नजर रखी जा रही है, ताकि इनसे टैक्स की वसूली की जा सके. बिहार में आंतरिक स्रोतों से सबसे ज्यादा टैक्स जीएसटी से ही आता है. इस बार 24 हजार 730 करोड़ रुपये टैक्स संग्रह हुआ था. इसमें इस बार करीब 25 फीसदी बढ़ोतरी की संभावना है.
