अधिकारियों की लापरवाही पर हाइकोर्ट सख्त
पटना : पटना हाइकोर्ट ने सोमवार को स्वास्थ्य महकमे को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगायी है.न्यायमूर्ति ज्योति शरण तथा न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने एक लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण राज्य में स्वास्थ्य सेवा बदहाल है.
गरीब जनता के पास पैसा नहीं है कि वह बड़े अस्पताल की ओर रुख कर सके और सरकारी अस्पताल का आलम यह है कि इलाज के जगह उन्हें मौत मिलती है . कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को चेतावनी देते हुए कहा कि अदालती फैसले का पालन नहीं किया गया तो अगली तारीख पर विभाग पर 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया जायेगा. कोर्ट ने मामले पर अगली सुनवाई की तारीख एक जुलाई तय की है.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्य के अस्पतालों में स्वीकृत पद रिक्त है . इन खाली पदों पर नियमित बहाली नहीं की जा रही है और कर्मियों को निविदा पर रखा जा रहा है. सरकार बड़े-बड़े दावा करती है लेकिन हकीकत कुछ और बया कर रही है. कोर्ट ने कहा कि विभाग के सचिव कोर्ट में आ कर बताते हैं कि स्वास्थ्य सेवा की बेहतरी के लिए सरकार क्या क्या कर रही है लेकिन उनका ही कुछ माह के भीतर तबादला कर दिया जाता है जिस से स्थिति जस की तस बनी रहती है .
कई सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्ट का पद ही नहीं
कई सरकारी अस्पताल ऐसे है जहां फार्मासिस्ट का पद नहीं है. बगैर फार्मासिस्ट के अस्पताल चल रहा है. इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान में फार्मासिस्ट के पद नहीं होने पर भी कोर्ट ने हैरानी जताई. वही आइजीआइएमएस में फार्मासिस्ट है ही नहीं .
कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी सेक्रेटेरिएट में बैठ काम नहीं करते है काम करते तो राज्य में स्वास्थ्य सेवा का यह हालत नहीं होता .कोर्ट जब निर्देश देता है तो सिटी स्कैन, एमआरआइ मशीन लगायी जाती है .डायलेसिस मशीन लगा दी गयी, लेकिन एक छोटा सा केमिकल उपलब्ध नहीं कराएं जाने के कारण मशीन बेकार पड़ा हुआ है .
