पटना : रीढ़ की हड्डी में दर्द को नहीं करें नजरअंदाज

एकदिवसीय कार्यशाला में 70 स्पाइन के डॉक्टरों ने लिया भाग पटना : उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ की हड्डी में होने वाले तकलीफ का समय पर उपचार करा लें. तकलीफ को टाल कर बढ़ाएं नहीं. क्योंकि, इस स्थिति में गंभीर बीमारी भी हो सकती है. यह कहना है दिल्ली से आये डॉ एचएस छाबरा का. […]

एकदिवसीय कार्यशाला में 70 स्पाइन के डॉक्टरों ने लिया भाग
पटना : उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ की हड्डी में होने वाले तकलीफ का समय पर उपचार करा लें. तकलीफ को टाल कर बढ़ाएं नहीं. क्योंकि, इस स्थिति में गंभीर बीमारी भी हो सकती है. यह कहना है दिल्ली से आये डॉ एचएस छाबरा का.
दरअसल रविवार को गांधी मैदान स्थित एक होटल में बिहार ऑर्थोपेडिक्स एसोसिएशन व स्पाइन सोसाइटी ऑफ बिहार की ओर
से एकदिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ छाबड़ा, एसोसिएशन के सचिव डॉ राजीव आनंद व स्पाइन सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ वीके सिन्हा ने किया.
सेमिनार के दौरान दिल्ली से आये डॉ सुधीर कुमार व डॉ वसंत कुंज ने स्पाइन की नयी तरीके से सर्जरी के तकनीक बताएं. इसमें स्टेप बाइ स्टेप वीडियो दिखा कर रीढ़ की सर्जरी के आधुनिक पद्धति के बारे में बताया गया. डॉ राजीव आनंद ने कहा कि सेमिनार में 70 से अधिक स्पाइन विशेषज्ञों ने भाग लिया. सेमिनार में डॉ विश्वेंद्र कुमार सिन्हा ने रीढ़ की हड्डी की वजह से गर्दन में दर्द, कमर में दर्द, हाथ पैरों में दर्द, हाथ पैरों में कमजोरी, हाथ पैरों में सुन्नपन इत्यादि
नसों की तकलीफ पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि तकलीफ का समय पर निदान नहीं होने पर इसका प्रभाव शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ने लगता है. सेमिनार के मुख्य अतिथि आर्यभट्ट विवि के कुलपति डॉ अरुणकुमार अग्रवाल थे. मौके पर डॉ महेश प्रसाद, डॉ अविनाश कुमार, डॉ आनंद शंकर, डॉ अभिषेक सर्राफ आदि कई स्पाइन के डॉक्टर उपस्थित थे.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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