अनिकेत त्रिवेदी
आसान नहीं होगा शह-मात के खेल में माहिर पप्पू को हराना
पटना : नगर निगम में उपमहापौर पर अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी के बाद अब पार्षदों के बीच की राजनीति तेज हो गयी है. उपमहापौर के खिलाफ 42 पार्षदों की सूची सौंपे जाने के बाद अब वर्तमान उपमहापौर विनय कुमार पप्पू ने पार्षदों से समर्थन के लिए संपर्क करना शुरू कर दिया है.
शुक्रवार को लगभग दर्जन भर पार्षदों को फोन पर व मिल कर अपना पक्ष रखने व समर्थन में वोट करने की अपील की. उधर, मेयर गुट पार्षद भी अपनी दावेदारी को मजबूत करने पर लगे हैं. क्योंकि सबसे पता है कि विनय कुमार पप्पू निगम के पुराने पार्षद हैं. पहले भी उपमहापौर रह चुके हैं और निगम के राजनीति में शह-मात के पुराने खिलाड़ी है.
उपमहापौर की दौड़ में दो पार्षद : मेयर गुट में एक तरफ विनय पप्पू को हराने की तैयारी चल रही है. वहीं, दूसरी तरफ विनय पप्पू के हारने के बाद किसको उप महापौर बनाया जायेगा. इसकी भी तैयारी है. वर्तमान में यादव-मुस्लिम समीकरण पर ही काम किया जा रहा है.
मेयर गुट इस गणित में लगा हुआ है कि यादव डिप्टी मेयर को हटा कर दूसरे यादव पार्षद को ही डिप्टी मेयर बनाया जाये. क्योंकि, निगम के 75 पार्षदों में से 18 पार्षद यादव हैं. इसके लिए वार्ड 39 की पार्षद भारती देवी का नाम चल रहा है. इसके अलावा तीसरा गुट, जो वर्तमान में मेयर के साथ है वो वार्ड 40 के पार्षद असफर अहमद को डिप्टी मेयर बनाने के लिए लाॅबिंग कर रहा है. असफर ईद मिलन के बहाने पार्षदों को भोज भी दे चुके हैं.
मेयर से अधिक था डिप्टी मेयर को समर्थन : निगम में बीते कई वर्षों से एक बात कॉमन रही है. पहले नयी सरकारी में मेयर व डिप्टी मेयर साथ चुनाव लड़ कर आते हैं.
एक दूसरे को समर्थन रहता है, लेकिन दो वर्ष बीतने के बाद एक दूसरे के विरोधी हो जाते हैं. विनय पप्पू जब 2010 में डिप्टी मेयर बने थे और 2012 में उनकी कुर्सी चली गयी थी. इसके बाद रूप नारायण मेहता के साथ भी यहीं हुआ था. अब एक बार फिर विनय कुमार पप्पू के साथ ऐसा ही हो रहा है. हालांकि, अब मेयर गुट का कहना है कि डिप्टी मेयर तो कभी हमारे थे ही नहीं. अगर ऐसा होता तो शुरुआत में उनको 52 पार्षदों का समर्थन मिलता और मेयर को 38 पार्षदों का.
फिर केंद्र में आये अफजल इमाम
नगर की राजनीति के केंद्र में पूर्व मेयर अफजल इमाम का नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया है. विनय पप्पू गुट के पार्षदों का कहना है कि डिप्टी मेयर पर अविश्वास प्रस्ताव लाना तो एक बहाना है, असली निशाना मेयर की कुर्सी पर है. अगर, विनय पप्पू हार जाते हैं तो उनके समर्थन वाले पार्षदों को साथ लेकर सीता साहू पर अविश्वास प्रस्ताव लाया जायेगा.
