लोकसभा चुनाव में बाहुबलियों का नहीं चला जादू, पांच में दो ही जीते

पटना : लोकसभा चुनाव में बाहुबलियों का करिश्मा नहीं चला. पांच सीटों में दो सीटों पर ही बाहुबली के रिश्तेदारों ने अपना परचम लहराया. सीवान में अजय सिंह की पत्नी कविता सिंह व नवादा में सूरजभान के भाई चंदन कुमार चुनाव जीतने में कामयाब रहे. वहीं मुंगेर, सुपौल व मधेपुरा में इनका जादू नहीं चला. […]

पटना : लोकसभा चुनाव में बाहुबलियों का करिश्मा नहीं चला. पांच सीटों में दो सीटों पर ही बाहुबली के रिश्तेदारों ने अपना परचम लहराया. सीवान में अजय सिंह की पत्नी कविता सिंह व नवादा में सूरजभान के भाई चंदन कुमार चुनाव जीतने में कामयाब रहे. वहीं मुंगेर, सुपौल व मधेपुरा में इनका जादू नहीं चला. चुनाव में पप्पू यादव को छोड़ कर पर्दे के पीछे से उनकी लड़ाई बाहुबली खुद लड़ रहे थे. चुनावी रणनीति बनाने से लेकर वोटों को साधने तक में उनकी भूमिका रही. इसके बावजूद सीवान व नवादा को छोड़ कर सुपौल, मुंगेर व मधेपुरा में जीत का परचम नहीं लहरा सके.

सीवान में बाहुबली शहाबुद्दीन की पत्नी व राजद प्रत्याशी हिना शहाब का मुकाबला बाहुबली अजय सिंह की पत्नी व जदयू प्रत्याशी कविता सिंह से था. मो शहाबुद्दीन अभी तिहाड़ जेल में बंद हैं. इसका खास फायदा उनकी पत्नी हिना शहाब को नहीं मिला, जबकि अजय सिंह अपनी पत्नी को जिताने में कामयाब रहे. हिना शहाब लगातार तीन बार से चुनाव हार रही हैं.
दो बार ओमप्रकाश यादव ने उन्हें हराया. मुंगेर में बाहुबली विधायक अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी कांग्रेस से चुनाव लड़ीं. जदयू प्रत्याशी व जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह ने उनहें चुनाव में हराया. पिछले लोकसभा चुनाव में मुंगेर से सूरजभान की पत्नी वीणा देवी लोजपा के टिकट पर जीती थीं.
नवादा में बाहुबली सूरजभान िसंह के भाई चंदन कुमार ने बाहुबली राजबल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी को हराया है. राजबल्लभ यादव नाबालिग लड़की के साथ रेप के आरोप में जेल में बंद हैं. चुनाव में उनकी पत्नी को खास मदद नहीं मिलने से चुनाव हारना पड़ा.
सुपौल में बाहुबली पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ीं. पिछले लोकसभा चुनाव में उन्हें जीत मिली थी. इस बार चुनाव में पप्पू यादव का नहीं चलने से उनकी पत्नी रंजीत रंजन को जदयू के दिलेश्वर कामैत से हार का सामना करना पड़ा. वहीं, पप्पू यादव खुद मधेपुरा सीट निकालने में सफल नहीं रहे. पिछले लोकसभा चुनाव में वे राजद से चुनाव जीते थे. बार-बार बयानों को बदले जाने के कारण जनता ने उन्हें नकार दिया.

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