आनंद तिवारी, पटना : घरेलू कलह व आपसी लड़ाई-झगड़े से न केवल पति-पत्नी के रिश्ते में खटास आ रही है, बल्कि यह तनाव का सबसे बड़ा कारण भी है. इसका खामियाजा पूरे परिवार को झेलना पड़ता है. अगर समय पर पति-पत्नी ने तनाव का इलाज नहीं कराया, तो मुश्किलों में इजाफा होता है.
वैवाहिक जिंदगी तबाह हो जाती है. यह खुलासा पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आइजीआइएमएस) के मानसिक रोग विभाग की ओर से किये गये रिसर्च में हुआ है. आइजीआइएमएस की एथिकल कमेटी की देखरेख में विभाग के तीन डॉक्टरों ने यह रिसर्च किया है.
अपने रिसर्च में इन डॉक्टरों ने पांच महीने में इलाज कराने आये 205 महिला-पुरुषों को शामिल किया और उन्हें बचाव को लेकर टिप्स भी दिये. इनमें 20 से 40 साल तक की 110 महिलााएं और 95 पुरुष थे. डॉक्टरों के मुताबिक छोटी-छोटी बातों को लेकर घरेलू कलह होता है. पुरुष व महिलाएं दोनों तनाव की चपेट में आते हैं. लेकिन महिलाओं पर तनाव का असर अधिक होता है.
बदलते सामाजिक परिवेश में महिलाएं बड़े पैमाने पर तनाव की शिकार हो रही हैं. इनमें कामकाजी महिलाओं की तादाद सबसे अधिक है. जहां घरेलू महिलाओं को घर के अनुकूल माहौल नहीं होने से तनाव होता है, वहीं कामकाजी महिलाएं घरेलू व बाहरी दोनों कारणों से तनाव की शिकार हो रही हैं. अक्सर महिलाएं अपनी पीड़ा बयां नहीं कर पाती हैं.
समय पर इलाज से रिश्तों में सुधार
आइजीआइएमएस के मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ राजेश गर्ग ने बताया कि तनाव का समय पर इलाज जरूरी है. इलाज में देरी से बीमारी बढ़ जाती है. कई बार परिवार बिखर जाते हैं. डॉक्टरों की मानें, तो समय पर इलाज से बीमारी के साथ घर में खराब हुए माहौल भी अच्छे हो जाते हैं. रिश्तों में सुधार भी लाया जा सकता है.
इन मुद्दों पर बिगड़ती है बात
घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हो, पति बेरोजगार हो, तो घर में झगड़े होते रहते हैं
पति के पर्याप्त समय न देने को लेकर नाखुश रहती हैं महिलाएं
अधिकतर को लगता है कि पति उनको लेकर फिक्रमंद नहीं हैं
30% झगड़े पुरुष के घर देरी से आने की वजह से हुए
कामकाजी महिलाएं सोचती हैं कि पति उससे अधिक कमाएं
