समान काम समान वेतन का मामला, नियोजित शिक्षकों के वेतन पर फैसला आज

पटना : नियोजित शिक्षकों के लिए समान काम, समान वेतन की मांग पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को अपना चिर प्रतीक्षित फैसला सुनायेगा. कोर्ट की वेबसाइट पर इस केस को 10 मई के लिए लिस्टेड किया गया है. जस्टिस अभय मनोहर सप्रे और जस्टिस उदय उमेश ललित की खंडपीठ में इस मामले की अंतिम सुनवाई पिछले […]

पटना : नियोजित शिक्षकों के लिए समान काम, समान वेतन की मांग पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को अपना चिर प्रतीक्षित फैसला सुनायेगा. कोर्ट की वेबसाइट पर इस केस को 10 मई के लिए लिस्टेड किया गया है.
जस्टिस अभय मनोहर सप्रे और जस्टिस उदय उमेश ललित की खंडपीठ में इस मामले की अंतिम सुनवाई पिछले साल तीन अक्तूबर को हुई थी. तब फैसला सुरक्षित रखा गया था. इस तरह करीब सात माह बाद फैसला आयेगा. इस फैसले से बिहार के करीब पौने चार लाख शिक्षक प्रभावित होंगे.
2009 में बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने बिहार में नियोजित शिक्षकों के लिए समान काम समान वेतन की मांग पर एक याचिका पटना हाइकोर्ट में दाखिल की थी. लंबी सुनवाई के बाद पटना हाइकोर्ट ने 31 अक्तूबर, 2017 को बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के पक्ष में फैसला दिया था और कहा कि नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिए. बाद में इस फैसले के खिलाफ बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गयी.
तब से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 24 अलग-अलग दिन सुनवाई हुई. इस दौरान दोनों पक्षों से नामी-गिरामी वकीलों ने बहस की. इनमें कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे वकील शामिल रहे. अंतिम सुनवाई वर्ष 2018 में तीन अक्तूबर को हुई. जानकारों के मुताबिक बिहार के प्राथमिक स्कूल से लेकर प्लस टू विद्यालयों के शिक्षक इस फैसले से प्रभावित होंगे.
पौने चार लाख शिक्षक होंगे प्रभावित
2009 : बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने समान काम के लिए समान वेतन को लेकर पटना हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की
31 अक्तूबर, 2017 : पटना हाइकोर्ट ने नियोजित शिक्षकों के पक्ष में सुनाया फैसला, समान काम के लिए समान वेतन देने का दिया आदेश
03 अक्तूबर, 2018 : सुप्रीम कोर्ट में हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई पूरी
केंद्र व राज्य सरकार ने कहा था, नहीं दिया जा सकता है समान वेतन
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने स्पष्ट कहा था कि नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन नहीं दिया जा सकता. केंद्र सरकार ने भी इसका समर्थन किया था.
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में 36 पन्नों का हलफनामा दिया था, जिसमें कहा गया था कि इन्हें समान काम के लिए समान वेतन नहीं दिया जा सकता, क्योंकि समान काम के लिए समान वेतन के कैटेगरी में ये शिक्षक नहीं आते. नियमित शिक्षकों के तर्ज पर इन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन देने पर सालाना करीब 36,998 करोड़ का अतिरिक्त भार आयेगा.
पंजाब से जुड़े एक मामले में कोर्ट दे चुका है समान वेतन का फैसला
सुप्रीम कोर्ट में जब इस मामले की सुनवाई चल रही थी, उसी दौरान पंजाब राज्य से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने समान काम और समान वेतन मामले में एक अहम फैसला सुनाया.
जस्टिस जेएस खेहड़ और न्यायमूर्ति एसए बोबडे की पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि समान कार्य के लिए समान वेतन की परिकल्पना संविधान के विभिन्न प्रावधानों को परीक्षण करने के बाद आयी है. पीठ ने कहा कि अगर कोई कर्मचारी दूसरे कर्मचारियों के समान काम या जिम्मेदारी निभाता है, तो उसे दूसरे कर्मचारियों से कम मेहनताना नहीं दिया जा सकता.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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