पटना : कुछ दिनों पहले श्रीलंका में इस्टर के मौके पर चर्च और होटल में आठ बड़े धमाके हुए थे. इस आतंकी वारदात की जिम्मेदारी एक नये आतंकी संगठन एनटीजे (नेशनल तौहिद जमात) ने ली है. कुख्यात आतंकी संगठन आइएसआइएस से यह संगठन जुड़ा हुआ है.
इसकी जड़े सिर्फ श्रीलंका में ही नहीं हैं. बल्कि, केरल समेत अन्य कई राज्यों में फैली हुई हैं. बिहार भी इससे अछूता नहीं है. राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी एनआइए, आइबी समेत अन्य ने भी इस संगठन और इससे जुड़े लोगों के बारे में विस्तार से जानकारी जुटानी शुरू कर दी है. जांच में यह बात सामने आयी है कि बिहार के अररिया, मधुबनी, किशनगंज और दरभंगा जिलों में इस संगठन के स्लीपर सेल के छिपे होने की आशंका जतायी गयी है.
इस आशंका को लेकर पुलिस मुख्यालय को भी सूचना देते हुए चौकस रहने के लिए कहा गया है. इन चार जिलों के अलावा तमाम सीमावर्ती इलाकों में मौजूद थानों को भी अलर्ट रहने के लिए कहा गया है. इन इलाकों में इस प्रतिबंधित संगठन के स्लीपर सेल की खोज शुरू हो गयी है. इस बात की पड़ताल की जा रही है कि इनका कोई संदिग्ध इस इलाके में छिपा है या नहीं. किसी स्थानीय के साथ कोई संपर्क है या नहीं, इसकी जांच भी गहनता से चल रही है.
एनटीजे में अधिकांश पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल लोग शामिल हैं. ऐसे में इनके स्लीपर सेल का विस्तार हो सकता है. मधुबनी और दरभंगा के इलाके में इससे पहले भी कुछ प्रमुख स्लीपर सेल आतंकियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इसमें सबसे प्रमुख यासिन भटकल शामिल है, जो इंडियन मुजाहिद्दीन का स्लीपर सेल का प्रमुख था.
वह कई वर्षों तक यूनानी डॉक्टर बनकर मधुबनी में प्रैक्टिस कर रहा था. इसी की आड़ में उसने अपना आतंकी नेटवर्क का विस्तार किया था. बाद में वह गिरफ्तार हुआ था. इस तरह के कई स्लीपर सेल इस इलाके से गिरफ्तार हो चुके हैं. ऐसे में इन इलाकों में इस बार भी स्लीपर सेल होने की बात से पूरी तरह से इनकार नहीं किया जा सकता है.
