जिस रिवर फ्रंट का निर्माण पूरा कर गंगा पर घाट बनाने का दंभ भरा जा रहा है. जिस योजना पर तीन से चार वर्षों में 254 करोड़ की राशि खर्च की जा चुकी है. पांच किमी से भी लंबे पक्के व कलात्मक पाट का निर्माण हो गया है. आखिर उस पर लोग क्यों घूमने जायेंगे, ये अपने आप में एक सवाल है.
दरअसल, नये घाटों के सामने उस तरफ न गंगा का पानी है और न ही इन घाटों पर जाने के लिए कहीं से कोई बेहतर रास्ता है. कोई पतली, संकरी और गंदी गलियों से होकर उन घाटों तक पहुंचता भी है तो उसे शहर से निकलने वाले नाले के गंदे पानी का दीदार होता है. घाट की सीढ़ियां मिट्टी और बेकार की घासों के पास जाकर समाप्त होती हैं. ऐसे में घाट निर्माण करने के निर्णय, गंगा को नजदीक लाने के सुस्त प्लान से लेकर अधूरी योजना पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है. पढ़िए अनिकेत त्रिवेदी की रिपोर्ट.
नेशनल मिशन ऑफ गंगा क्लीनिंग का प्रोजेक्ट
पटना में गंगा घाट बनाने की योजना केंद्र सरकार की है. जो देश भर में चल रहे नेशनल मिशन ऑफ क्लीनिंग प्रोजेक्ट के तहत कई शहरों में किया गया है. राजधानी में लगभग 254.75 करोड़ की लागत से 20 घाटों का निर्माण होना है. इसमें 16 घाटों के रिवर फ्रंट तैयार हो चुके हैं.
पीएम की ओर से उद्घाटन भी हो चुका है. गाय घाट, भद्र घाट, महावीर घाट व नौजार घाट पर काम बाकी है. इनके निर्माण के लिए राशि स्वीकृति नहीं है और रोशन घाट से आलमगंज घाट में पाथ-वे का काम बाकी है. 500 में 350 मीटर का काम पूरा हो चुका है. हालांकि इतने बड़े प्रोजेक्ट का आम आदमी फायदा नहीं उठा पा रहे हैं.
अशोक राजपथ से लगे हैं सभी घाट
रिवर फ्रंट योजना के तहत जिन घाटों का निर्माण किया गया है, उनमें से अधिकांश घाट अशोक राजपथ से लगे हैं. महज एक से आधा किमी की दूरी पर सभी घाट सटे हैं. बावजूद इसके अधिकांश घाटों का एप्रोच रोड नहीं बनाया गया है.
सभी घाटों पर जाने के लिए पुराने व संकरे रास्ते हैं. कई जगहों पर अतिक्रमण है. अगर कोई वाहन से घाट पर जाना चाहता है तो गांधी घाट या एक दो और घाटों को छोड़ कर किसी घाट पर नहीं जाया जा सकता है. दूसरी तरफ अधिकांश समय अशोक राजपथ पर जाम की समस्या रहती है. इस कारण जाना और भी दूभर हो जाता है.
कहीं जाने का रास्ता नहीं
गंगा घाट पर जाने के सारे रास्ते अशोक राजपथ से होकर जाते हैं. राजपथ से ही घाटों पर जाने के लिए लिंक मार्ग का इस्तेमाल करना होता है.
घाटों पर भी परेशानी
पथरी घाट, रोशन घाट से लेकर अन्य घाटों पर जाने में भी परेशानी होती है. कई घाटों पर जाने के लिए पक्के घाट का निर्माण नहीं किया गया है.
कई फेजों में होना है काम
गंगा घाटों का निर्माण लगभग पूरा हो गया है, लेकिन कुछ जगहों निर्माण अभी भी अधूरे हैं?
जवाब : 16 से अधिक घाटों का निर्माण पूरा हो गया है, गुलबी घाट के आगे कुछ घाटों पर काम पूरे करने हैं. आज ही उनकी समीक्षा की गयी है. जल्द से जल्द सभी 20 घाटों के काम पूरे हो जायेंगे.
घाट तो बन कर तैयार हैं, लेकिन गंगा नदी के बदले सामने नाले का पानी बह रहा है, ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के क्या फायदे?
जवाब : देखिए, नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा में गंदा पानी नहीं गिरे, इसके लिए शहर में कई जगहों पर एसटीपी का निर्माण किया जा रहा है. 2021 तक सभी निर्माण पूरे हो जायेंगे. इससे गंगा मैली नहीं होगी.
लेकिन गंगा घाटों से दूर चली गयी है, फिर घाट तक गंगा का पानी कैसे आयेगा?
जवाब : नमामि गंगे परियोजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से आगे भी कई काम किये जाने हैं. जिसमें दोनों तरफ के बांधों को मजबूत करना है, गाद की सफाई की जानी है. इससे भविष्य में गंगा नजदीक आयेगी.
दूसरी बड़ी समस्या है कि अधिकांश घाटों पर आने के लिए ठीक से रास्ता नहीं है, लोग अपने वाहन से नहीं आ सकते. ऐसे में उनको घाट तक आने की सुविधा नहीं मिलती ?
जवाब : एप्रोच रोड को अतिक्रमण मुक्त करने का प्लान है. जिला प्रशासन और विभाग के निर्देश पर आगे कार्रवाई होगी.
जिन जगहों पर रास्ता बिल्कुल नहीं है, उन जगहों पर क्या होगा?
जवाब : इसके लिए नगर विकास व आवास विभाग में योजना बनी है, जल्द ही अमल में लाया जायेगा.
