एम्स दवा दुकान मामला
पटना : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना में ब्रांडेड कंपनियों के रैपर लगा कर नकली व महंगी दवा बेचने वाले दुकान का लाइसेंस रद्द हो सकता है. साथ ही जिस दवा कंपनी से दवाओं की खरीद बिक्री की जाती है उससे भी औषधि विभाग पूछताछ कर सकती है.
औषधि विभाग ने माना है कि दवा दुकान सस्ती दवाओं की जगह नकली व महंगे रैपर लगाकर मरीजों को दवा बेचता था. विभाग ने कहा है कि पक्की रसीद व दवा बेचने वाली सभी रसीद के कार्बन कॉपी को पेश नहीं किया गया तो कार्रवाई के तौर पर दवा दुकान का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है. औषधि विभाग के ड्रग इंस्पेक्टर विश्वजीत दास गुप्ता ने कहा कि श्री उमियां इंटरप्राइजेज नाम की दवा दुकान का आवंटन ही गलत तरीके से किया गया है
