पटना : बिहार के 102 प्रखंड भूगर्भीय जल संकट से जूझ रहे हैं. सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड इन प्रखंडों काे क्रिटिकल घोषित कर चुका है. क्रिटिकल श्रेणी में राजधानी का पटना सदर इलाका भी शामिल है.
इस से संबंधित आधिकारिक रिपोर्ट इसी माह शासन को सौंपी गयी है. भूजल की गिरावट को देखते हुए शासन ने मंगलवार और बुधवार को देश के जाने-माने जल विशेषज्ञों (जल पुरुष राजेंद्र सिंह सहित) को पटना बुलाकर सुझाव मांगे. दिये गये सुझावों के मद्देनजर बिहार वाटर लिट्रेसी इंस्टीट्यूट का निर्माण हो सकता है. इसमें पानी बचाने के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन और परंपरागत प्रबंधकीय मुद्दों के एक्सपर्ट तैयार किये जायेंगे.
फिलहाल इस संबंध में अंतिम निर्णय 25 अप्रैल के बाद लिया जायेगा. इस संबंध में शासन के शीर्ष अफसरों की बैठक बुलायी गयी है. गजब की बात यह है कि बिहार में जल की उपलब्धता वाले उत्तर बिहार में भूजल स्तर सात मीटर तक खिसका है.
432 प्रखंड अब भी सेफ जोन में
सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 534 प्रखंडों में अभी भी 432 जल उपलब्धता के हिसाब से सेफ जोन में हैं. 72 प्रखंड सेमी क्रिटिकल, 18 प्रखंड क्रिटिकल और 12 प्रखंड ऐसे हैं जो उपलब्धता से ज्यादा पानी दोहन कर रहे हैं.
कुल मिला कर 102 प्रखंड भूगर्भीय जल उपलब्धता के हिसाब से संकट की देहरी पर हैं. पटना के सात प्रखंड भूगर्भीय जल संकट के लिहाज से चिंताजनक माने गये हैं.
बिहार के 102 प्रखंड भूजल उपलब्धता के हिसाब से कठिन जोन में रखे गये हैं. बेशक अभी स्थिति भयावह नहीं है, लेकिन बिहार उस दिशा में चल पड़ा है. दरअसल भूजल उपलब्धता के हिसाब से बेहद समृद्ध इलाका कोसी क्षेत्र में भी भूजल गिर रहा है. फिलहाल बिहार सरकार जागृत हुई है. वाटर लिट्रेसी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
