पटना : बढ़ने के बदले घटीं रजिस्टर्ड शादियां, न निबंधन बढ़ रहा, न जागरूक हो रहे लोग

अनिकेत त्रिवेदी पटना : अब इसे जागरूकता का अभाव कहेंगे या उत्साह की कमी. आंकड़े बिल्कुल चौंकाने वाले हैं. जिस निबंधन शादियों का आंकड़ा समय के साथ वर्ष दर-दर बढ़ना चाहिए, वो आंकड़ा स्थिर ही नहीं अब कम भी होने लगा है. जी हां, हम बात कर रहे हैं विशेष विवाह अधिनियम 1954 व बिहार […]

अनिकेत त्रिवेदी
पटना : अब इसे जागरूकता का अभाव कहेंगे या उत्साह की कमी. आंकड़े बिल्कुल चौंकाने वाले हैं. जिस निबंधन शादियों का आंकड़ा समय के साथ वर्ष दर-दर बढ़ना चाहिए, वो आंकड़ा स्थिर ही नहीं अब कम भी होने लगा है.
जी हां, हम बात कर रहे हैं विशेष विवाह अधिनियम 1954 व बिहार विवाह निबंधन नियमावली 2006 के अधीन जिला निबंधन कार्यालय में होने वाली रजिस्टर्ड शादियों की. जिला निबंधन कार्यालय के आंकड़े बात रहे हैं कि वित्तीय वर्ष 2017-18 के अंत में होने वाले कुल निबंधित शादियों का संख्या 2072 थीं, जो बीते वित्तीय वर्ष 2018-19 के अंत में घट कर 2018 हो गयी हैं. अब भले ही अंतर मात्र 54 का दिख रहा हो, लेकिन इसके पीछे ये सोचने वाली बात है कि आखिर विकास, शिक्षा और जागरूकता के दौर में समय के साथ जिस बात को बढ़ना चाहिए, आखिर वो घट क्यों रहा है.
नये और पुराने, दोनों तरह के निबंधन में कमी : जिला निबंधन कार्यालय में दो तरह की शादियों का निबंधन किया जाता है. पहला, नये जोड़ों की शादियों को निबंधित किया जाता है. उसे सरकारी मान्यता दी जाती है.
निबंधन कार्यालय में पुरानी संपन्न शादियों का भी निबंधन कराया जाता है. फार्म, आवश्यक कागजात और गवाह के आधार पर निबंधन कार्य संपन्न होता है. अब दो क्रमिक रूप से बीते वित्तीय वर्ष में दोनों प्रकार के निबंधनों में गिरावट है.
नहीं हो रही खास वृद्धि
बीते सात वर्षों के आंकड़ों को वर्षवार देखा जाये, तो निबंधित शादियों की संख्या में कुछ वृद्धि हुई है. हालांकि ये अंतर काफी मामूली है. जहां कानूनी दांव पेज के मामले, तलाक के मामले, पति-पत्नी के बीच संपत्ति विवाद जैसे मामलों में वृद्धि हुई है. वहीं उपरोक्त कामों में अपने आधार को मजबूत करने के लिए जरूरी निबंधित शादियों की संख्या की वृद्धि खास नहीं है.
वर्ष व निबंधन की संख्या
वर्ष नये पुराने
2012 668 672
2013 770 784
2014 777 779
2015 784 865
2016 1040 940
2017 1194 903
2018 1122 954
मुखिया व पार्षद स्तर पर नहीं किया जा रहा निबंधन
बिहार विवाह निबंधन नियमावली 2006 के तहत मुखिया व वार्ड पार्षद को भी शादियां निबंधित करने का अधिकार है. जिसका निबंधन कर जिला निबंधन कार्यालय में सूचना दी जानी होती है. लेकिन लोकल स्तर पर जनप्रतिनिधियों में इसको लेकर कोई जागरूकता नहीं है. जबकि मामला और घट ही रहा है. वर्ष 2014 में 117 जनप्रतिनिधियों ने निबंधन कराया था.

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